जम्मू: बाबा बर्फानी की पवित्र अमरनाथ यात्रा को लेकर धार्मिक आस्था और पौराणिक मान्यताओं का विशेष महत्व है। ऐसी ही एक प्रसिद्ध मान्यता अमरनाथ गुफा में दिखाई देने वाले कबूतरों के जोड़े से जुड़ी है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इन ‘अमर पक्षियों’ के दर्शन हर किसी को नहीं होते, बल्कि केवल वही भक्त इस दुर्लभ जोड़े को देख पाता है जिस पर भगवान शिव की विशेष कृपा होती है।
माता पार्वती ने पूछा था अमरत्व का रहस्य
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से अमरत्व का रहस्य जानने की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद भगवान शिव उन्हें ऐसी एकांत जगह पर ले गए, जहां इस रहस्य को कोई अन्य जीव न सुन सके। कहा जाता है कि इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने वाहन नंदी, सर्प और पुत्र गणेश सहित अन्य साथियों को रास्ते में ही छोड़ दिया।
अमरनाथ गुफा में सुनाई गई थी अमरत्व की कथा
मान्यता है कि भगवान शिव माता पार्वती को लेकर उस पवित्र गुफा में पहुंचे, जिसे आज अमरनाथ गुफा के नाम से जाना जाता है। यहीं उन्होंने अमरत्व का रहस्य सुनाना शुरू किया। इसी दौरान गुफा में मौजूद कबूतरों के एक जोड़े ने भी पूरी कथा सुन ली और अमरत्व का वरदान प्राप्त कर लिया।
आज भी श्रद्धालुओं को होते हैं दुर्लभ दर्शन
धार्मिक विश्वास के अनुसार अमरनाथ यात्रा के दौरान कुछ श्रद्धालुओं को आज भी इन कबूतरों के जोड़े के दर्शन होते हैं। माना जाता है कि यह सामान्य घटना नहीं है, बल्कि भगवान शिव की विशेष कृपा का संकेत है। कई श्रद्धालु इन पक्षियों को अमरत्व और दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक मानते हैं।
शिव-पार्वती का स्वरूप भी मानते हैं कई श्रद्धालु
कुछ धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि यह कबूतरों का जोड़ा स्वयं भगवान शिव और माता पार्वती का प्रतीक स्वरूप है। इसलिए इनके दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यात्रा के दौरान यदि यह जोड़ा दिखाई दे जाए तो जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
दर्शन होने पर मानी जाती है विशेष कृपा
लोकमान्यताओं के अनुसार जिन श्रद्धालुओं को अमर पक्षियों के दर्शन होते हैं, उनके वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही जीवन की परेशानियां दूर होने, मनोकामनाएं पूर्ण होने और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होने जैसी मान्यताएं भी इससे जुड़ी हुई हैं। हालांकि ये सभी बातें धार्मिक आस्था और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित हैं।