वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउथ कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास को कम करने का आदेश दिया है। ट्रंप की नाराजगी की वजह ईरान को लेकर सियोल का रुख बताया जा रहा है। ट्रंप का कहना है कि साउथ कोरिया ने ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त कराने के अमेरिकी प्रयास में साथ देने से इनकार कर दिया। उन्होंने इस फैसले के साथ नॉर्थ कोरिया के प्रति अपने नरम रुख और उसके नेता किम जोंग उन के साथ अच्छे संबंधों का भी हवाला दिया है।
महंगे सैन्य अभ्यास और नॉर्थ कोरिया को गलत संदेश का तर्क
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इसी सप्ताह शुरू होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास काफी महंगे हैं। उनके मुताबिक, ये अभ्यास नॉर्थ कोरिया को ऐसा संदेश देते हैं, जो गलत होने के साथ-साथ शत्रुतापूर्ण भी है।
ट्रंप ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान नॉर्थ कोरिया ने अमेरिका को कभी धमकी नहीं दी और दोनों पक्षों के बीच सम्मानजनक व्यवहार रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में उन्होंने साउथ कोरिया के राष्ट्रपति से ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त कराने की अमेरिकी कोशिश में सहयोग मांगा था, लेकिन सियोल ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
‘ईरान के मुद्दे पर साउथ कोरिया ने हमारा साथ नहीं दिया’
ट्रंप ने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने संयुक्त सैन्य अभ्यास को काफी कम करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में साउथ कोरिया के राष्ट्रपति से पूछा था कि क्या वह ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त कराने के अमेरिकी प्रयास में साथ देना चाहेंगे। ट्रंप के मुताबिक, उन्हें इसका जवाब इनकार में मिला।
इसी आधार पर ट्रंप ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को संयुक्त सैन्य अभ्यास में बड़ी कटौती करने का निर्देश दिया है।
ट्रंप प्रशासन के रुख में दिख रहा बड़ा बदलाव
ट्रंप के इस फैसले को अमेरिका के सहयोगी साउथ कोरिया से दूरी और नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले अमेरिकी प्रशासन नॉर्थ कोरिया को एक बड़े विरोधी के तौर पर देखते रहे हैं, जबकि ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे संबंधों का कई बार जिक्र किया है।
ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने पर ट्रंप प्रशासन पहले भी नाटो के सहयोगी देशों की आलोचना कर चुका है। ऐसे में साउथ कोरिया को लेकर ट्रंप का ताजा रुख उनके प्रशासन की नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
18 हजार सैनिकों के साथ होने वाला था 11 दिन का सैन्य अभ्यास
साउथ कोरिया और अमेरिका के बीच प्रस्तावित संयुक्त सैन्य अभ्यास 11 दिनों तक चलने वाला था। इसमें करीब 18,000 साउथ कोरियाई सैनिकों के शामिल होने की योजना थी। इस अभ्यास का मकसद नॉर्थ कोरिया से संभावित खतरों से निपटने के लिए दोनों देशों की सैन्य तैयारियों और संयुक्त अभियान क्षमता को मजबूत करना था।
इस सैन्य अभ्यास की योजना उस समय शुरू की गई थी, जब नॉर्थ कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण गतिविधियां फिर से शुरू की थीं।
डेमोक्रेटिक सीनेटर ने ट्रंप के फैसले पर उठाए सवाल
ट्रंप के फैसले की डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क केली ने कड़ी आलोचना की है। ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट के कुछ घंटे बाद केली ने कहा कि संयुक्त सैन्य अभ्यास को नजरअंदाज करना गलत है और यह सोच की कमी को दर्शाता है।
इस बीच ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर भी बड़ा बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अमेरिका का स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर पूरा नियंत्रण है और उनका देश इसे बनाए रखने का इरादा रखता है।