जब पूरा देश चैन की नींद सो रहा था, तब 2 अक्टूबर की सुबह एक अलग ही हलचल लेकर आई। 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के मौके पर देश के कोने-कोने में सन्नाटा नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद और बापू के आदर्शों का सैलाब उमड़ पड़ा है। इस बार का नजारा कुछ जुदा है—जहाँ एक तरफ स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में छुट्टी का पुराना चलन टूटा है, वहीं दूसरी तरफ मैदानों से लेकर चौपालों तक एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आइए जानते हैं कि देश भर में किस तरह बापू के उन सपनों को जमीन पर उतारा जा रहा है, जिनकी गूंज आज हर जुबान पर है।
छुट्टियों के बजाय स्कूलों-दफ्तरों में गूंजे बापू के विचार और कार्यशालाएं
इस बार गांधी जयंती का दिन महज़ एक सामान्य अवकाश बनकर नहीं रह गया है। कई राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों ने एक अनूठी पहल करते हुए छुट्टियों के बजाय स्कूलों में विशेष कार्यक्रमों और कार्यशालाओं का आयोजन किया है।
इन आयोजनों का मकसद नई पीढ़ी को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर बापू के सत्य, अहिंसा और सादगी वाले जीवन दर्शन से सीधे रूबरू कराना है। छात्र-छात्राएं बढ़-चढ़कर इन गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।
बैतूल और शामली समेत कई जिलों में विशेष जनजागरूकता अभियान
सिर्फ भाषणों तक सीमित न रहकर, इस बार जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव की शुरुआत हुई है। बैतूल और शामली समेत देश के कई जिलों में आज से विशेष अभियानों का आगाज कर दिया गया है।
इन अभियानों का मुख्य फोकस समाज से नशामुक्ति को जड़ से उखाड़ना, स्वच्छता के महाअभियान को तेज करना, और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। नुक्कड़ नाटक और रैलियों के जरिए गांधीजी के ग्राम स्वराज्य के सपने को जीवंत किया जा रहा है।
माल्यार्पण से लेकर क्रॉस-कंट्री दौड़ तक प्रतियोगिताओं का दौर
दिन की शुरुआत राजकीय भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद देशभर के संस्थानों में युवाओं और बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का तांता लग गया है। भाषण, वाद-विवाद, निबंध लेखन, प्रश्नोत्तरी और क्रॉस-कंट्री दौड़ जैसी गतिविधियों में युवाओं का जोश देखते ही बनता है, जो यह साबित करता है कि बापू के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती सिर्फ महापुरुषों को याद करने का दिन नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाने का भी अवसर है। स्कूलों में विशेष कार्यक्रमों से लेकर स्वच्छता, नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण अभियानों तक, इन पहलों का उद्देश्य नई पीढ़ी को सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना है। बापू के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत और शास्त्री जी का सादगी व कर्तव्य का संदेश आज भी समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं।