पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान एक बार फिर सुर्खियों में हैं. अदियाला जेल में बंद इमरान खान को गिरफ्तार हुए 845 दिन से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अब उनकी जिंदगी को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
पिछले कई हफ्तों से न तो उनके परिवार को इमरान खान से मिलने दिया गया है और न ही कोई आधिकारिक वीडियो या बयान जारी हुआ है. इसी वजह से सोशल मीडिया पर उनकी मौत की अफवाहें तेज़ी से फैल रही हैं, जिसने पूरे पाकिस्तान के राजनीतिक माहौल को हिला कर रख दिया है.
जेल के बाहर रातभर हंगामा
अदियाला जेल के बाहर देर रात भारी तनाव देखने को मिला. इमरान खान के समर्थक और PTI नेताओं ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री की हालत बताने से रोका जा रहा है. जेल प्रबंधन ने अफवाहों से इनकार किया है, लेकिन प्रूफ ऑफ लाइफ न जारी होने से सवाल और बढ़ गए हैं.
कासिम खान का पोस्ट बना हलचल की वजह
इस बीच, इमरान खान के बेटे कासिम खान का सोशल मीडिया पोस्ट पूरे पाकिस्तान में आग की तरह फैल गया।
अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि: कि इमरान खान को पिछले छह हफ्तों से ऐसी जगह रखा गया है, जहां न किसी से संपर्क की अनुमति है और न ही परिवार को कोई सूचना दी जा रही है. उन्होंने लिखा कि उनके पास अपने पिता के जीवित होने का भी कोई सबूत नहीं है. इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया। आम तौर पर राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले कासिम और उनके भाई मौजूदा हालात के चलते पहली बार खुलकर सामने आ गए.
सोशल मीडिया पर #ImranKhan हुआ ट्रेंड, फेक वीडियो वायरल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #ImranKhan हैशटैग ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स ने दावा किया कि इमरान को सेना प्रमुख आसिम मुनीर और आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) ने हिरासत में मार डाला.
कुछ यूजर्स ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें इमरान को स्ट्रेचर पर ले जाते दिखाया गया, लेकिन यह वीडियो जाली साबित हुआ. यह पहली बार नहीं है जब इमरान की मौत की ऐसी अफवाहें फैलाई गईं.
मई 2025 में भी एक फर्जी प्रेस रिलीज वायरल हुई थी, जिसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का नाम लिया गया था. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने तब इसे “फर्जी” बताते हुए जनता से अपील की थी कि ऐसी झूठी खबरों पर विश्वास न करें. वर्तमान अफवाहें भी उसी पैटर्न पर आधारित लग रही हैं, खासकर जब पीटीआई समर्थक जेल के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं.
परिवार पर पुलिस का अत्याचार
कुछ ख़बरों के अनुसार इमरान की बहनों—नूरीन नियाज़ी, अलीमा खान और डॉ. उज़मा खान—ने मंगलवार को जेल पहुंचकर मिलने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें “क्रूरता से पीटा” और घसीटा. पीटीआई ने इसे “राजनीतिक साजिश” करार दिया और चीफ जस्टिस से स्वत: संज्ञान लेने की अपील की. पार्टी का कहना है कि इमरान को “आतंकवादियों के लिए बनी डेथ सेल” में रखा गया है, जो उनकी सेहत के लिए खतरा है. पाकिस्तान सरकार ने एक महीने से अधिक समय से इमरान से मुलाकातों पर अनौपचारिक प्रतिबंध लगा रखा है. पीटीआई के अनुसार, यह “साइलेंट कूप” का हिस्सा है, जहां सेना और सरकार मिलकर इमरान को अलग-थलग करने की कोशिश कर रही है. इमरान की पत्नी बुशरा बीबी ने समर्थकों से “शांतिपूर्ण विरोध” जारी रखने की अपील की है.
ये अफवाहें पिछले साल 26 नवंबर 2024 को हुए पीटीआई के बड़े जलसे की याद दिला रही हैं, जब इस्लामाबाद में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं. उस दिन छह लोग मारे गए थे, और सरकार ने रैली पर सख्ती बरतते हुए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं. पाकिस्तान से मिल रही जानकारी के मुताबिक, हुक्मरान उस तरह का हंगामा दोबारा नहीं चाहते. लिहाजा इमरान खान को कई हफ्तों से परिजनों से भी नहीं मिलने दिया गया है, ताकि वे किसी तरह इमरान का कोई संदेश जारी न कर सकें. उम्मीद जताई जा रही है कि नवंबर माह नहीं तो दिसंबर से उनको परिजनों से फिर मिलने दिया जाएगा.
पीटीआई ने “शहीदों” की याद में पेशावर में सभा बुलाई है. यह घटना पाकिस्तान की उथल-पुथल वाली राजनीति को उजागर करती है, जहां सेना का दखल और विपक्षी दमन आम है. अधिक अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों का इंतजार करें.