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एपस्टीन फाइल्स में बिल गेट्स! मेलिंडा ने तोड़ी चुप्पी, पैंडेमिक सिमुलेशन से लेकर भारत को “लैबोरेटरी” बनाने तक – गेट्स का गन्दा खेल

news desk
Last updated: February 6, 2026 4:21 pm
news desk
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एपस्टीन फाइल्स में बिल गेट्स
एपस्टीन फाइल्स में बिल गेट्स
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कुछ हफ्ते पहले अमेरिकी न्याय विभाग ने एक बम फोड़ दिया। जेफरी एपस्टीन – वो शख्स जिसका नाम सुनते ही दुनियाभर के ताकतवर लोग कांप जाते हैं – से जुड़े लाखों दस्तावेज़ जारी कर दिए गए। और इन फाइल्स में जो नाम सबसे ज्यादा चमका, वो था बिल गेट्स का।

माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक, दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक, और “परोपकारी” कहलाने वाले बिल गेट्स अचानक गंभीर आरोपों के घेरे में आ गए। और सबसे दिलचस्प बात – उनकी पूर्व पत्नी मेलिंडा फ्रेंच गेट्स ने भी खामोशी तोड़ दी।

मेलिंडा का खुलासा: “ये दस्तावेज़ मेरी शादी के दर्दनाक दिनों की याद दिलाते हैं”

मेलिंडा ने एनपीआर के ‘वाइल्ड कार्ड’ पॉडकास्ट में जो कहा, वो सुनकर हर कोई चौंक गया। उन्होंने कहा, “ये दस्तावेज़ मेरी शादी के सबसे दर्दनाक दिनों की यादें ताजा कर देते हैं। मैं अब उन दिनों से दूर हूं और खुश हूं, लेकिन जिन लोगों के नाम इन फाइल्स में आते हैं, उन्हें खुद जवाब देना चाहिए।”

27 साल की शादी। तीन बच्चे। और फिर 2021 में अचानक तलाक। उस वक्त लोगों को समझ नहीं आया था कि आखिर क्या हुआ। लेकिन अब धीरे-धीरे पर्दा उठ रहा है।

मेलिंडा ने साफ संकेत दिया कि एपस्टीन से गेट्स के संबंध उनकी शादी टूटने की वजहों में से एक हो सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “ये सवाल गेट्स और दूसरों के लिए हैं, मेरे लिए नहीं। मैं उनसे दूर हूं।”

गेट्स की तरफ से क्या जवाब आया? उन्होंने सभी आरोपों को ‘पूर्णतः झूठा और बेतुका’ बताते हुए खारिज कर दिया। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि एपस्टीन से मिलना उनकी “बड़ी भूल” थी।

2017 की वो ईमेल: पैंडेमिक सिमुलेशन की बात, कोविड से तीन साल पहले

अब आती है सबसे विवादास्पद बात। फाइल्स में 2017 की एक ईमेल का उल्लेख है। यानी कोविड-19 महामारी से पूरे तीन साल पहले। इस ईमेल में एपस्टीन और गेट्स के बीच ‘स्ट्रेन पैंडेमिक सिमुलेशन’ की चर्चा की गई है।

इसमें क्या था? स्वास्थ्य डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, न्यूरोटेक्नोलॉजी, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स का जिक्र। सोशल मीडिया पर तो तूफान आ गया। लोग इसे कोविड-19 की ‘पूर्व-योजना’ बताने लगे।

सोचिए – 2017 में पैंडेमिक सिमुलेशन की बात, और 2020 में दुनिया भर में कोविड फैल गया। संयोग? या कुछ और?

और पैसों की बात करें तो – रिपोर्ट्स के मुताबिक, फाइजर, बायोएनटेक, मॉडर्ना और सिनोवैक ने 2021-2022 में वैक्सीन से करीब 90 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया। हां, आपने सही पढ़ा – 90 अरब डॉलर!

फैक्ट-चेकर्स क्या कहते हैं?

अब यहां दिलचस्प मोड़ आता है। फैक्ट क्रेसेंडो जैसी फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स कहती हैं कि इन फाइल्स में गेट्स और एपस्टीन के बीच सीधे ‘स्ट्रेन पैंडेमिक सिमुलेशन’ की चर्चा का कोई ठोस सबूत नहीं है। उनका कहना है कि यह ईमेल एपस्टीन की खुद की ड्राफ्ट्स में है, और गेट्स ने इसे पूरी तरह खारिज किया है।

लेकिन सवाल यह है – अगर यह सिर्फ एपस्टीन की ड्राफ्ट है, तो इसमें इतनी विस्तृत जानकारी कहां से आई? और अगर यह सब झूठ है, तो एपस्टीन ने ऐसी चीजें क्यों लिखीं?

एक्स (पहले ट्विटर) पर यूजर्स ने इसे ‘ग्लोबलिस्ट सिस्टम का पतन’ बताया। हालांकि विशेषज्ञ इसे ओवर-इंटरप्रेटेशन मानते हैं। मतलब, लोग चीजों को जरूरत से ज्यादा गंभीरता से ले रहे हैं।

STD और एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स

एपस्टीन की 2013 की ड्राफ्ट ईमेल्स में दावा किया गया है कि गेट्स ने ‘रूसी लड़कियों’ से संबंध बनाए और उन्हें STD (यौन संचारित रोग) हो गया।

और सबसे चौंकाने वाली बात – ईमेल में लिखा है कि गेट्स ने अपनी तत्कालीन पत्नी मेलिंडा को बिना बताए एंटीबायोटिक्स देने की कोशिश की।

गेट्स ने इसे ‘पूर्णतः झूठा’ बताया है। लेकिन अगर यह झूठ है, तो मेलिंडा ने तलाक क्यों लिया? क्या सच में यह सब सिर्फ “व्यक्तिगत मतभेद” थे, जैसा कि तलाक के वक्त कहा गया था?

पॉपुलेशन रिडक्शन: जनसंख्या कम करने की साजिश?

2010 के TED टॉक में गेट्स ने एक बात कही थी जो आज तक विवादों में है। उन्होंने कहा था कि वैक्सीन्स के जरिए वैश्विक आबादी को 10-15% कम किया जा सकता है।

3. भारत को “लैबोरेटरी” मानना

हाल ही में गेट्स ने एक पॉडकास्ट में भारत को ‘चीजें ट्राई करने की लैबोरेटरी’ कहा। यह सुनते ही पूरे देश में बवाल मच गया। और यह कोई खोखला आरोप नहीं है। 2009 में गेट्स फाउंडेशन द्वारा फंडेड वैक्सीन ट्रायल्स में 14,000 आदिवासी लड़कियों पर प्रयोग किए गए। इनमें से 7 लड़कियों की मौत हो गई।

सरकारी जांच में कहा गया कि मौतें वैक्सीन से असंबंधित थीं। लेकिन जैसा कि पहले लेख में बताया गया – कोई पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ, साइड इफेक्ट्स की ठीक से निगरानी नहीं की गई, और संसदीय समिति ने नैतिक उल्लंघनों की भारी आलोचना की।

तो क्या सच में भारत उनके लिए एक लैबोरेटरी है, जहां वे गरीबों पर प्रयोग करते हैं?

4. अन्य विवादास्पद फंडिंग

फाइल्स में और भी कई चीजों का जिक्र है:

  • H5N1 बर्ड फ्लू पर गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च: यानी वायरस को और खतरनाक बनाने की रिसर्च
  • अफ्रीका में बायोलैब्स: जहां संदिग्ध प्रयोग किए गए
  • वैक्सीन पासपोर्ट के लिए क्वांटम डॉट इंप्लांट्स: शरीर में चिप लगाने जैसी तकनीक को फंडिंग

गेट्स ने इनमें से कई आरोपों को खारिज किया है। लेकिन सवाल यह है – जब इतने सारे आरोप एक साथ आते हैं, तो क्या सब को झूठ कहकर टाला जा सकता है?

एक्स (पहले ट्विटर) पर लोग भड़क गए हैं। एक यूजर ने लिखा, “मेलिंडा गेट्स एपस्टीन रिंग के खिलाफ बोल रही हैं, और उम्मीद है कि न्याय होगा।”

एक्स (पहले ट्विटर) पर लोग भड़क गए हैं। एक यूजर ने लिखा, “मेलिंडा गेट्स एपस्टीन रिंग के खिलाफ बोल रही हैं, और उम्मीद है कि न्याय होगा।” दूसरे ने इसे ‘सेटेनिक ग्लोबलिस्ट सिस्टम’ (शैतानी वैश्विक व्यवस्था) कहा। लोगों का मानना है कि दुनिया को कुछ ताकतवर लोग चला रहे हैं, और अब उनका पर्दाफाश हो रहा है।

एपस्टीन फाइल्स ने एक बार फिर साबित किया है कि दुनिया के ताकतवर लोग कैसे काम करते हैं। उनके लिए गरीब देशों के लोग सिर्फ संख्याएं हैं, प्रयोग के लिए चूहे हैं।

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