सेहत

बच्चेदानी की सफाई (D&C) कब और क्यों की जाती है? क्या इससे मां बनने की क्षमता पर पड़ता है असर, गायनोकॉलोजिस्ट से समझिए पूरी सच्चाई

नई दिल्ली: महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कई मेडिकल प्रक्रियाओं को लेकर आज भी समाज में कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। ऐसी ही एक प्रक्रिया है डी एंड सी (Dilation and Curettage), जिसे आम भाषा में ‘बच्चेदानी की सफाई’ कहा जाता है। गर्भपात, असामान्य रक्तस्राव या गर्भाशय से जुड़ी कुछ चिकित्सीय स्थितियों में डॉक्टर इस प्रक्रिया की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, कई महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि क्या डी एंड सी कराने से भविष्य में गर्भधारण करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सही तकनीक और उचित चिकित्सकीय निगरानी में की गई डी एंड सी आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती है और अधिकांश मामलों में इससे प्रजनन क्षमता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।

क्या होती है D&C प्रक्रिया?

बिड़ला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ सेंटर की विशेषज्ञ और सेंटर हेड डॉ. मुस्कान छाबरा के अनुसार, डी एंड सी महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण मेडिकल प्रक्रिया है। यदि गर्भपात के बाद गर्भाशय में कुछ ऊतक शेष रह जाएं, तो उन्हें निकालने के लिए यह प्रक्रिया की जाती है। विशेषज्ञ स्पष्ट करती हैं कि गर्भपात और डी एंड सी दोनों अलग-अलग चीजें हैं। डी एंड सी केवल जरूरत पड़ने पर गर्भाशय की सफाई या जांच के उद्देश्य से की जाती है।

किन स्थितियों में डॉक्टर देते हैं D&C की सलाह?

डी एंड सी का इस्तेमाल केवल उपचार के लिए ही नहीं, बल्कि कई स्त्री रोगों की जांच के लिए भी किया जाता है। यदि किसी महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा हो, रजोनिवृत्ति के बाद ब्लीडिंग हो रही हो या गर्भाशय की अंदरूनी परत का बायोप्सी सैंपल लेना हो, तो डॉक्टर इस प्रक्रिया की सलाह दे सकते हैं। इसके जरिए गर्भाशय की परत में पॉलीप, असामान्य बदलाव या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की पहचान करने में भी मदद मिलती है।

जांच ही नहीं, इलाज का भी हिस्सा है D&C

विशेषज्ञों के मुताबिक, कई मामलों में डी एंड सी उपचार का भी हिस्सा होती है। यदि गर्भाशय की अंदरूनी परत सामान्य से अधिक मोटी हो जाए और उसी कारण लगातार या अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा हो, तो अतिरिक्त परत हटाकर स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।

कैसे की जाती है यह प्रक्रिया?

डी एंड सी आमतौर पर शॉर्ट जनरल एनेस्थीसिया के तहत की जाती है, जिससे मरीज को प्रक्रिया के दौरान दर्द महसूस नहीं होता। सबसे पहले गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) को धीरे-धीरे फैलाया जाता है। इसके बाद विशेष उपकरण की मदद से गर्भाशय की अंदरूनी परत या आवश्यक ऊतक निकाले जाते हैं। यह डे-केयर प्रक्रिया होती है और सामान्य तौर पर 15 से 20 मिनट में पूरी हो जाती है। अधिकांश मरीज उसी दिन घर लौट सकते हैं।

क्या D&C सुरक्षित प्रक्रिया है?

डॉ. मुस्कान छाबरा बताती हैं कि किसी भी मेडिकल प्रक्रिया की तरह इसमें भी कुछ जोखिम हो सकते हैं, लेकिन अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा सही तकनीक से किए जाने पर जटिलताओं की संभावना काफी कम रहती है।

क्या D&C से फर्टिलिटी प्रभावित होती है?

विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में सही तरीके से की गई डी एंड सी से महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। हालांकि, यदि किसी दुर्लभ स्थिति में गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम को गंभीर नुकसान पहुंच जाए, तो भविष्य में गर्भधारण करने में कठिनाई हो सकती है। यही वजह है कि यह प्रक्रिया केवल चिकित्सकीय आवश्यकता होने पर ही कराई जानी चाहिए।

फर्टिलिटी किन बातों पर निर्भर करती है?

डॉक्टर के मुताबिक, सफल गर्भधारण के लिए दो प्रमुख बातें महत्वपूर्ण होती हैं। पहली, पुरुष के शुक्राणु और महिला के अंडाणु की गुणवत्ता, जिससे भ्रूण का निर्माण होता है। दूसरी, गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम का स्वस्थ होना, जहां निषेचित अंडा जाकर विकसित होता है।

क्या एंडोमेट्रियम दोबारा बन जाता है?

विशेषज्ञ बताती हैं कि एंडोमेट्रियम हर महीने हार्मोनल बदलावों के साथ दोबारा विकसित होता है। मासिक धर्म के दौरान इसकी ऊपरी परत निकल जाती है और फिर नई परत बनती है। इसलिए सामान्य और सही तरीके से की गई डी एंड सी के बाद अधिकांश महिलाओं में यह परत फिर से सामान्य रूप से विकसित हो जाती है।

किन परिस्थितियों में बढ़ सकता है खतरा?

यदि प्रक्रिया के दौरान एंडोमेट्रियम को अत्यधिक नुकसान पहुंच जाए या एशरमैन सिंड्रोम जैसी जटिलता विकसित हो जाए, तो भविष्य में भ्रूण के गर्भाशय में सही तरीके से स्थापित होने में परेशानी आ सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति सामान्य नहीं होती।

D&C के बाद किन जोखिमों की संभावना रहती है?

कुछ मामलों में डी एंड सी के दौरान या बाद में संक्रमण, अधिक रक्तस्राव, गर्भाशय में छेद (यूटेराइन परफोरेशन) या आसपास के अंगों को नुकसान पहुंचने जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। हालांकि, ये जोखिम अपेक्षाकृत दुर्लभ माने जाते हैं।

रिकवरी में कितना समय लगता है?

अधिकांश महिलाएं डी एंड सी के बाद 4 से 5 दिनों के भीतर सामान्य दिनचर्या में लौट सकती हैं। हालांकि, पूरी तरह ठीक होने का समय महिला की स्वास्थ्य स्थिति और प्रक्रिया के कारण पर निर्भर करता है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

यदि प्रक्रिया के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, तेज पेट दर्द, तेज बुखार, लगातार चक्कर आना या हाथ-पैर ठंडे पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

D&C के बाद शारीरिक संबंध कब बनाना सुरक्षित है?

विशेषज्ञों की सलाह है कि डी एंड सी के बाद अगला सामान्य मासिक धर्म आने तक शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है और गर्भाशय को पूरी तरह ठीक होने का समय मिल जाता है।

D&C से जुड़े आम मिथक और सच्चाई

डॉक्टर के अनुसार, यह धारणा गलत है कि डी एंड सी के बाद हमेशा पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। यदि प्रक्रिया सही तरीके से हुई है, तो मासिक धर्म सामान्य रहता है। इसी तरह यह भी मिथक है कि डी एंड सी से पेट बढ़ जाता है या शरीर में स्थायी सूजन आ जाती है। प्रक्रिया एनेस्थीसिया के तहत होती है, इसलिए इसके दौरान दर्द महसूस नहीं होता। बाद में कुछ समय तक हल्की तकलीफ होना सामान्य माना जाता है।

विशेषज्ञ की सलाह

डॉ. मुस्कान छाबरा के अनुसार, डी एंड सी एक सुरक्षित और प्रभावी मेडिकल प्रक्रिया है, लेकिन इसे केवल चिकित्सकीय जरूरत होने पर ही कराया जाना चाहिए। बार-बार डी एंड सी कराने से बचना चाहिए। आजकल कई मामलों में यह प्रक्रिया हिस्टेरोस्कोपी या अल्ट्रासाउंड की मदद से की जाती है, जिससे इसकी सटीकता और सुरक्षा दोनों बढ़ जाती हैं।

 

vineet verma

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