पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का असंतोष अब एक बड़े विस्फोट में बदल चुका है। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) और संदीपन साहा (Sandipan Saha) की अगुवाई में टीएमसी के भीतर महाराष्ट्र जैसी बड़ी बगावत की पटकथा लिख दी गई है।
सूत्रों और संख्या बल के दावों के मुताबिक, टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 60 से अधिक विधायकों का समर्थन बागी गुट को हासिल है। इसके साथ ही पार्टी न सिर्फ टूटने की कगार पर खड़ी है, बल्कि सिंबल (चुनाव चिन्ह) खोने का खतरा भी मंडराने लगा है।
कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में सोमवार रात चली मैराथन बैठकों के बाद बागी विधायकों का समूह विधानसभा पहुंच चुका है।
बागी विधायक मुस्तफिजुर रहमान का बयान: “हम सभी ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमारी मांग है कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय के बजाय किसी अन्य बेहद वरिष्ठ नेता को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाए। इसी वजह से हमें यह कड़ा रुख अपनाना पड़ा है।”
पार्टी के भीतर इस ऐतिहासिक विद्रोह के पीछे पांच सबसे बड़े कारण सामने आ रहे हैं, जिन्हें लेकर पार्टी कार्यकर्ता और सीनियर लीडर्स लंबे समय से घुट रहे थे:
राजनीतिक विश्लेषक इस पूरी घटना को साल 1998 के इतिहास से जोड़कर देख रहे हैं।
आज करीब 28 साल बाद इतिहास खुद को दोहरा रहा है, लेकिन इस बार ममता बनर्जी कांग्रेस की भूमिका में हैं और उनकी अपनी बनाई पार्टी में ठीक वैसी ही टूट हो रही है जैसी उन्होंने कभी कांग्रेस में की थी।
पश्चिम बंगाल की इस महा-बगावत से जुड़े हर पल के लाइव अपडेट्स और विश्लेषण के लिए हमारे लाइव ब्लॉग के साथ बने रहिए।
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