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US-Iran War: अमेरिकी पायलट के रेस्क्यू पर छिड़ा ‘दावों का दंगल’, ट्रंप ने कहा-मिशन सफल; ईरान का दावा- मार गिराए 3 विमान

तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान की धरती पर गिरे अमेरिकी F-15E फाइटर जेट के पायलट को बचाने के मिशन ने मिडिल ईस्ट की जंग को एक नया और खतरनाक मोड़ दे दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहाँ अपने ‘कर्नल’ की सुरक्षित वापसी का जश्न मनाया है, वहीं ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने सनसनीखेज दावा किया है कि इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान उन्होंने अमेरिका के दो हेलीकॉप्टर और एक सपोर्ट विमान को तबाह कर दिया है।

ईरान का बड़ा दावा: ‘अमेरिकी मिशन हुआ नाकाम’

IRGC के खातम अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB से बात करते हुए अमेरिका के दावों को खारिज किया। ईरान का दावा है कि इस्फहान के दक्षिण में 2 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और 1 C-130 सपोर्ट एयरक्राफ्ट को मार गिराया गया है। जोल्फागरी के मुताबिक, इस कार्रवाई में 5 लोग मारे गए हैं और अमेरिकी विमान अभी भी जल रहे हैं।

मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया (X) पर कथित तौर पर जलते हुए अमेरिकी विमानों की तस्वीरें साझा कर इस दावे को पुख्ता करने की कोशिश की है।

ट्रंप का काउंटर अटैक: ‘हमारा जांबाज सुरक्षित है’

दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस मिशन की सफलता की पुष्टि की। उन्होंने इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास के सबसे साहसी कारनामों में से एक बताया।

“डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मेरे साथी अमेरिकियों, हमारी सेना ने एक बहुत सम्मानित कर्नल और शानदार क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया है। वह घायल जरूर हैं, लेकिन जल्द ही बिल्कुल ठीक हो जाएंगे। हमने उन्हें खोज निकाला!”

$60,000 का इनाम और 48 घंटे का सस्पेंस

ईरान ने इस अमेरिकी सैनिक को पकड़ने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। खबरों के मुताबिक ईरान ने पायलट का सुराग देने वाले के लिए 60,000 डॉलर (करीब 50 लाख रुपये) के इनाम का ऐलान किया था।

अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने अपने अफसर को बचाने के लिए सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशन कमांडोज को ईरान के भीतरी इलाकों में उतारा था। अमेरिकी कर्नल 48 घंटे तक ईरान के खतरनाक पहाड़ों में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से लुका-छिपी खेलते रहे।

मिशन ‘इस्फहान’: क्या वाकई हुआ नुकसान?

युद्ध के मैदान से आ रही खबरें विरोधाभासी हैं। जहाँ अमेरिका अपने सैनिक की सुरक्षित वापसी को बड़ी जीत बता रहा है, वहीं ईरान इसे अमेरिका की सैन्य विफलता के रूप में पेश कर रहा है।

  • ईरान का पक्ष: अमेरिकी घुसपैठ नाकाम रही, हमने उनके विमानों को जला दिया।
  • अमेरिका का पक्ष: मिशन का मुख्य उद्देश्य (सैनिक को बचाना) पूरा हुआ, कर्नल अब सुरक्षित हाथों में हैं।

बढ़ सकता है तनाव

ईरान की धरती पर इस तरह के बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन और विमानों के गिरने के दावों के बाद अब दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य टकराव और तेज होने की आशंका है। इस्फहान का इलाका सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील है, और यहाँ हुई गोलाबारी आने वाले दिनों में बड़े पलटवार का संकेत दे रही है।

news desk

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