मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए व्यावहारिक मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है। अब नए लाइसेंस और बैच जारी करने से पहले चालकों का मराठी का मौखिक परीक्षण लिया जाएगा। परिवहन विभाग इस नियम को लागू करने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है और 20 अगस्त से कार्रवाई शुरू करने की तैयारी है।
परिवहन विभाग की बैठक में बनी आगे की रणनीति
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की अध्यक्षता में बुधवार को परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें चालकों के मराठी भाषा ज्ञान की जांच, परीक्षण की प्रक्रिया और पर्याप्त मराठी नहीं आने पर की जाने वाली कार्रवाई को लेकर दिशा-निर्देशों पर चर्चा की गई।
मंत्री के मुताबिक 12 अगस्त 2026 से महाराष्ट्र में रिक्शा और टैक्सी चलाने के लिए व्यावहारिक मराठी का ज्ञान अनिवार्य किया गया है। इसी व्यवस्था के तहत 20 अगस्त से कार्रवाई शुरू होगी।
मराठी नहीं आई तो पहले नोटिस, फिर निलंबन
जिन ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को व्यावहारिक मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं होगा, उन्हें पहले नोटिस जारी किया जाएगा। उन्हें भाषा सीखने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा।
एक महीने बाद भी सुधार नहीं होने पर चालक का लाइसेंस और बैच तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। इसके बाद भी भाषा सीखने से इनकार करने या नियमों के प्रति लापरवाही बरतने पर लाइसेंस और बैच स्थायी रूप से रद्द किए जाने की कार्रवाई हो सकती है।
आरटीओ अधिकारी करेंगे औचक जांच
मराठी भाषा के ज्ञान की जांच के लिए आरटीओ अधिकारियों की ओर से स्टेशनों और रिक्शा स्टैंडों पर औचक निरीक्षण किया जाएगा। अधिकारी चालकों से मराठी में बातचीत करेंगे और इस बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। इसका उद्देश्य जांच की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है।
नए लाइसेंस के लिए मौखिक परीक्षा जरूरी
अब नए ऑटो-रिक्शा और टैक्सी लाइसेंस या बैच जारी करते समय चालक के लिए मराठी का मौखिक परीक्षण अनिवार्य होगा। परीक्षा की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। इसके अलावा चालकों के निवास प्रमाण पत्रों की भी कड़ाई से जांच की जाएगी, ताकि फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सके।
105 दिन चला मराठी सिखाने का अभियान
मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने 105 दिनों तक ‘हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान’ चलाया था। इस अभियान के दौरान 1,65,600 गैर-मराठी चालकों को मराठी भाषा का प्रशिक्षण दिया गया और उन्हें प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
सरकार बोली- रोजगार छीनना नहीं, भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देना उद्देश्य
परिवहन मंत्री ने यात्रियों से भी अपील की है कि वे ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के साथ मराठी में बातचीत करें, जिससे चालकों को भाषा सीखने में मदद मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी चालक का रोजगार छीनना नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की संस्कृति और अस्मिता को बनाए रखना है।
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