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शोमैन की यादों का आशियाना टूटा! राज कपूर की पेशावर हवेली का हिस्सा बारिश-भूकंप से ढहा,अधिकारियों ने की तत्काल बहाली की अपील

पेशावर, 5 अप्रैल 2026: बॉलीवुड के महान अभिनेता राज कपूर की यादों को संजोने वाली पेशावर स्थित कपूर हवेली (Kapoor Haveli) पर प्रकृति का कहर टूटा है। शुक्रवार रात (3 अप्रैल 2026) को आए भूकंप के तेज झटकों और पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण इस ऐतिहासिक इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन 100 साल पुरानी इस धरोहर के अस्तित्व पर अब बड़ा खतरा मंडरा रहा है।


भूकंप और बारिश ने कमजोर की कपूर हवेली की नींव

पेशावर के ऐतिहासिक किस्सा ख्वानी बाजार में स्थित यह हवेली लंबे समय से जर्जर हालत में थी। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार:

  • शुक्रवार रात आए भूकंप ने पहले से कमजोर हो चुकी दीवार को गिरा दिया।
  • मलबे की वजह से आसपास की संकरी गलियां बंद हो गई हैं।
  • खैबर पख्तूनख्वा (KPK) हेरिटेज काउंसिल के सचिव शकील वहीदुल्लाह ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत Urgent Restoration नहीं किया गया, तो पूरी इमारत जमींदोज हो सकती है।

कपूर हवेली का इतिहास और सांस्कृतिक महत्व

कपूर हवेली का निर्माण 1918 से 1922 के बीच पृथ्वीराज कपूर के पिता ने करवाया था। ‘शोमैन’ राज कपूर का जन्म भी इसी शहर में हुआ था। इस हवेली का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि:

  1. राष्ट्रीय धरोहर: पाकिस्तान सरकार ने 2016 में इसे ‘नेशनल हेरिटेज साइट’ घोषित किया था।
  2. सांस्कृतिक सेतु: यह हवेली भारत और पाकिस्तान के साझा फिल्मी इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
  3. पर्यटन: पेशावर आने वाले सिनेमा प्रेमी इस ऐतिहासिक स्थल को देखने जरूर पहुंचते हैं।

बहाली के प्रयास और बजट की सुस्त रफ्तार

पिछले कुछ सालों में राज कपूर और दिलीप कुमार की हवेलियों की मरम्मत के लिए लगभग ₹70 मिलियन के बजट की चर्चा हुई थी। हालांकि, जमीनी स्तर पर काम की गति धीमी रही। अब इस ताजा हादसे के बाद स्थानीय निवासियों और सांस्कृतिक प्रेमियों ने पाकिस्तान सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।


यह घटना क्यों मायने रखती है? (Analysis Section)

सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल ईंट-पत्थर को बचाना नहीं है, बल्कि इतिहास को जीवित रखना है। अगर यह हवेली गिरती है, तो दक्षिण एशियाई सिनेमा के स्वर्ण युग का एक अहम अध्याय हमेशा के लिए मिट जाएगा।

जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती बारिश और भूकंपीय गतिविधियां ऐसी पुरानी इमारतों के लिए बड़ा खतरा बन गई हैं। ऐसे में ऐतिहासिक संपत्तियों के संरक्षण के लिए बजट के साथ-साथ त्वरित कार्रवाई की भी आवश्यकता होती है।

news desk

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