ज्यूरिख/वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट (Middle East) में दशकों पुराने तनाव को खत्म करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में शुरू होने जा रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बातचीत का नेतृत्व करने के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं।
यह महावार्ता पिछले सप्ताह दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते के तहत हो रही है, जिसमें स्थायी समाधान खोजने के लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय की गई है।
क्या है अमेरिका और ईरान का ‘गिव एंड टेक’ फॉर्मूला?
पहले दौर की इस बातचीत में दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामने अपनी शर्तें और प्रस्ताव रखे हैं, जो इस प्रकार हैं:
- अमेरिका की शर्त: वाशिंगटन चाहता है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के निरीक्षकों को तुरंत जाने की अनुमति दे। इन ठिकानों का आखिरी बार निरीक्षण जून 2025 में हुआ था।
- ईरान को क्या मिलेगा?: यदि ईरान इसके लिए तैयार होता है, तो अमेरिका कतर के बैंकों में फंसी ईरान की 6 अरब डॉलर की जमी हुई रकम (Frozen Funds) को रिलीज करने के लिए तैयार है। इस राशि का उपयोग केवल मानवीय जरूरतों जैसे भोजन और दवाओं के लिए किया जा सकेगा।
महाबैठक में कौन-कौन शामिल? पाकिस्तान बना मध्यस्थ
इस कूटनीतिक वार्ता को सफल बनाने के लिए दुनिया के कई बड़े नेता स्विट्जरलैंड में जुटे हैं…
| देश | शामिल होने वाले प्रतिनिधि/नेता |
| अमेरिका | उपराष्ट्रपति जेडी वेंस |
| ईरान | विदेश मंत्री अब्बास अरागची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती |
| पाकिस्तान (मध्यस्थ) | प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर |
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उम्मीद जताई है कि इस बातचीत से न केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सहमति बनेगी, बल्कि इजराइल-लेबनान संघर्ष को रोकने का भी रास्ता साफ होगा।
बेंजामिन नेतन्याहू बन सकते हैं रोड़ा: अमेरिकी खुफिया एजेंसी की बड़ी चेतावनी
इस शांति प्रक्रिया के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (US Intelligence Agencies) ने एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक चेतावनी जारी की है।
इंटेलिजेंस इनपुट: रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) अपने घरेलू राजनीतिक दबाव के कारण लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखना चाहते हैं। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि नेतन्याहू का यह कड़ा रुख इस ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया में बड़ी रुकावट पैदा कर सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अल्टीमेटम
इस बीच व्यापारिक लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान आया है। ट्रंप ने साफ किया है कि 60 दिनों की इस बातचीत के दौरान वहां से गुजरने वाले जहाजों पर कोई शुल्क (Tariff) नहीं लगेगा। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शांति वार्ता विफल रही, तो अमेरिका भविष्य में भारी शुल्क लगाने से पीछे नहीं हटेगा।