रूस के राजनीतिक गलियारों से एक ऐसी बड़ी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यूक्रेन युद्ध की धधकती आग और पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बीच रूस में हुए संसदीय चुनावों के नतीजे आ चुके हैं, और राष्ट्रपति पुतिन की सत्तारूढ़ पार्टी ‘यूनाइटेड रशिया‘ ने इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए इतिहास रच दिया है। इस भारी-भरकम और अप्रत्याशित जीत ने यह साफ कर दिया है कि रूस के राजनीतिक मैदान में फिलहाल पुतिन का मुकाबला करने वाला दूर-दूर तक कोई नहीं है।
ऐतिहासिक और रिकॉर्डतोड़ जीत
रूस में 18 से 20 सितंबर के बीच हुए संसदीय चुनावों के नतीजे 21 सितंबर 2026 को सामने आए। सेंट्रल इलेक्शन कमीशन (CEC) के आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सत्तारूढ़ पार्टी ‘यूनाइटेड रशिया’ ने 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा (संसद के निचले सदन) में रिकॉर्ड 355 सीटें हासिल की हैं।
पार्टी को लगभग 57.83% वोट मिले, जबकि 2021 के पिछले चुनावों में उसे 49.8% वोट मिले थे। इस शानदार प्रदर्शन के साथ पार्टी ने संसद में अपना मजबूत संवैधानिक बहुमत बरकरार रखा है। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी करीब 13.8% वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
2021 के चुनावों से तुलना
2021 के रूसी संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सत्तारूढ़ पार्टी ‘यूनाइटेड रशिया’ ने स्टेट ड्यूमा में शानदार बहुमत हासिल किया था। 450 सीटों वाली संसद के निचले सदन में पार्टी ने कुल 324 सीटें अपने नाम की थीं।
इस चुनाव में पार्टी को लगभग 49.8 प्रतिशत वोट मिले थे। इन परिणामों के बाद यूनाइटेड रशिया ने ड्यूमा में अपनी मजबूत स्थिति और स्पष्ट बहुमत बरकरार रखा, जिससे सरकार के लिए महत्वपूर्ण कानून पारित करना काफी आसान हो गया। यह चुनाव रूस की राजनीति में पार्टी के वर्चस्व और प्रभाव को पूरी तरह से साबित करने वाला एक बेहद अहम राजनीतिक पड़ाव साबित हुआ था।
यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में मतदान
इस चुनाव की सबसे बड़ी और विवादित खासियत यह रही कि मतदान केवल मुख्य रूसी क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों में भी कराया गया जिन पर रूस ने नियंत्रण और विलय का दावा किया है।
इनमें डोनेत्स्क, लुहान्स्क, जापोरिज्जिया और खेरसॉन शामिल हैं। हालांकि, यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने इन क्षेत्रों में हुए मतदान को पूरी तरह अवैध और अमान्य करार दिया है। इसके बावजूद, राष्ट्रपति पुतिन ने इन चुनावों को राष्ट्रीय एकता और यूक्रेन युद्ध में डटे रूसी सैनिकों के समर्थन की एक बड़ी परीक्षा के रूप में पेश किया था, जिसमें उनकी पार्टी ने प्रचंड जीत दर्ज की है।
रूस के इन संसदीय चुनावों में ‘यूनाइटेड रशिया’ की यह रिकॉर्डतोड़ जीत साबित करती है कि तमाम अंतरराष्ट्रीय दबावों और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद देश के भीतर पुतिन की राजनीतिक पकड़ बेहद मजबूत बनी हुई है। इस प्रचंड बहुमत से पुतिन का राजनीतिक कद और अधिक ऊंचा हुआ है, जो आने वाले समय में रूस की आंतरिक और बाहरी नीतियों को एक नई दिशा देगा।