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ईरान को सैन्य दबाव से नहीं झुका पाया अमेरिका, अब आर्थिक नाकेबंदी की तैयारी; US ने दी सहयोगी देशों को बड़ी चेतावनी

vineet verma
Last updated: August 25, 2026 9:55 am
vineet verma
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वॉशिंगटन: ईरान के खिलाफ अमेरिका ने अब अपनी रणनीति बदलते हुए आर्थिक दबाव बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के साथ व्यापार और वित्तीय संबंध रखने वाले देशों, संस्थाओं और बैंकों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया गया है। इसे ‘आर्थिक डी-डे’ का नाम दिया गया है।

Contents
ईरान की ‘वित्तीय जीवन रेखा’ काटने की तैयारी‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत होगी कार्रवाईट्रंप खुद कर रहे हैं दूसरे देशों के नेताओं से बातईरान ने अमेरिकी धमकियों को बताया बेअसरचीन के सामने अमेरिका की सबसे बड़ी चुनौतीहोर्मुज संकट से बढ़ी आर्थिक मुश्किलक्या अमेरिका की नई रणनीति से बदलेगा ईरान पर दबाव?

अमेरिका का कहना है कि इस अभियान के जरिए ईरान की अर्थव्यवस्था को मिलने वाले उन सभी वित्तीय रास्तों को बंद किया जाएगा, जिनकी मदद से तेहरान कच्चे तेल की तस्करी, धन जुटाने और मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में सफल होता है। वहीं, ईरान ने अमेरिकी धमकियों को खारिज करते हुए कहा है कि अब दूसरे देश वाशिंगटन के दबाव को गंभीरता से नहीं लेते।

ईरान की ‘वित्तीय जीवन रेखा’ काटने की तैयारी

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने उन नेटवर्क और रास्तों की पहचान कर ली है, जिनके जरिए ईरान कच्चे तेल की तस्करी करता है, वित्तीय संसाधन जुटाता है और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार करता है।

बेसेंट ने चेतावनी दी है कि ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले इन वित्तीय रास्तों को एक-एक कर बंद किया जाएगा। उनका कहना है कि जो देश, विदेशी संस्थाएं या बैंक ईरान के साथ व्यापार और वित्तीय लेनदेन जारी रखेंगे, उन्हें अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था और डॉलर आधारित व्यापार प्रणाली से बाहर किया जा सकता है।

अमेरिकी प्रशासन का घोषित लक्ष्य ईरान की सरकार को मिलने वाले आर्थिक समर्थन को खत्म करना है, ताकि तेहरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाए।

‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत होगी कार्रवाई

स्कॉट बेसेंट ने बताया कि इस अभियान को आधिकारिक तौर पर ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ नाम दिया गया है। इसके तहत अमेरिकी वित्त, विदेश और रक्षा मंत्रालय की संयुक्त टीमें दुनिया के अलग-अलग देशों की सरकारों और संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर रही हैं।

अमेरिका की ओर से इन देशों को ईरान से जुड़ी आर्थिक गतिविधियां रोकने के लिए समयसीमा का पालन करने को कहा जा रहा है। हालांकि, अमेरिकी वित्त मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि संबंधित देशों को कितने समय के भीतर कार्रवाई करनी होगी और समयसीमा का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ किस तरह के कदम उठाए जाएंगे।

ट्रंप खुद कर रहे हैं दूसरे देशों के नेताओं से बात

अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई देशों के नेताओं से सीधे फोन पर बातचीत कर रहे हैं। उनसे ईरान के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंध खत्म करने की अपील की जा रही है।

अमेरिका का दावा है कि उसके दबाव का असर दिखाई देने लगा है। वाशिंगटन का कहना है कि जो देश उसका साथ देंगे, उन्हें साझेदारी के फायदे मिलेंगे, जबकि ईरान के साथ संबंध बनाए रखने वाले देशों को भी अंतरराष्ट्रीय अलगाव का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिकी प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक, ईरान से जुड़े करीब 60 संस्थानों, व्यक्तियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके अलावा सप्ताह के अंत तक एक प्रमुख वित्तीय संस्थान पर भी प्रतिबंध लगाने की तैयारी है। निशाने पर ईरान के तेल और ऊर्जा नेटवर्क के साथ परमाणु, मिसाइल और साइबर नेटवर्क, वैश्विक वित्तीय रास्ते, डिजिटल संपत्ति और विशेष धन हस्तांतरण से जुड़े तंत्र भी हैं।

ईरान ने अमेरिकी धमकियों को बताया बेअसर

अमेरिकी दबाव बढ़ने के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी संसद के स्पीकर और शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने अमेरिकी चेतावनियों को बेकार की कवायद बताया है।

गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका अब ऐसी आर्थिक स्थिति में नहीं है कि वह दूसरे देशों को ईरान के साथ अपने संबंध सीमित करने के लिए मजबूर कर सके। उन्होंने दावा किया कि ईरान के व्यापारिक साझेदारों ने संदेशों के जरिए साफ कर दिया है कि वे अमेरिकी चेतावनियों को महत्व नहीं दे रहे हैं।

चीन के सामने अमेरिका की सबसे बड़ी चुनौती

ईरान के साथ आर्थिक दबाव की अमेरिकी रणनीति में चीन सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले कई वर्षों से चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान से तेल खरीदना बंद करे, लेकिन बीजिंग ने अब तक इस दबाव को स्वीकार नहीं किया है।

अमेरिका ने उन प्रमुख चीनी बैंकों पर सीधे प्रतिबंध लगाने से भी परहेज किया है, जो ईरान के साथ इस व्यापार को आसान बनाने में भूमिका निभाते हैं। इसकी एक बड़ी वजह चीन की संभावित जवाबी कार्रवाई को माना जा रहा है।

होर्मुज संकट से बढ़ी आर्थिक मुश्किल

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष करीब छह महीने तक पहुंच चुका है। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से हमले रुके हुए हैं, लेकिन कोई शांति समझौता नहीं हुआ है। ऐसे में दोनों देशों के बीच स्थिति ‘न युद्ध, न शांति’ जैसी बनी हुई है।

दोनों ओर से समुद्री नाकाबंदी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से मालवाहक जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह प्रभावित है। इसका सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल के बाजार पर पड़ रहा है और तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

क्या अमेरिका की नई रणनीति से बदलेगा ईरान पर दबाव?

ईरान पर आर्थिक शिकंजा कसने की अमेरिकी रणनीति नई नहीं है। इससे पहले भी अमेरिका ईरानी कंपनियों और संस्थाओं को अपनी डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर चुका है। लेकिन ईरान ने कथित तौर पर फर्जी कंपनियों और नए नाम से पंजीकृत जहाजों के जरिए प्रतिबंधों से बचने के रास्ते तलाश लिए थे।

यही वजह है कि विशेषज्ञ अमेरिकी अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं। अगर ईरान इस बार भी ऐसे वैकल्पिक रास्ते खोज लेता है तो अमेरिकी रणनीति का असर सीमित रह सकता है।

हालांकि, ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस बार अभियान में उन सभी रास्तों को बंद करने पर जोर दिया जाएगा, जिनका इस्तेमाल ईरान प्रतिबंधों से बचने के लिए करता रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि अमेरिकी आर्थिक दबाव तेहरान को कितना झुका पाता है और ईरान के सहयोगी देश वाशिंगटन की चेतावनी के आगे किस हद तक पीछे हटते हैं।

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