चंडीगढ़: अभिनेत्री और सांसद किरण खेर के बेटे सिकंदर खेर चाहते हैं कि उनकी मां अब राजनीति से दूरी बनाकर एक बार फिर फिल्मों में सक्रिय हों। हालिया बातचीत में सिकंदर ने कहा कि किरण खेर का स्वभाव बेहद साफ और सीधा है और राजनीति की पेचीदगियों के लिए वह बिल्कुल उपयुक्त नहीं हैं। उनका मानना है कि किरण को अब सियासत के तनाव से ब्रेक लेकर अपने अभिनय पर ध्यान देना चाहिए।
किरण खेर ने 2009 में बीजेपी में शामिल होकर राजनीतिक सफर शुरू किया था। 2011 के चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार करने के बाद उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ सीट से उम्मीदवार बनाया गया। चुनाव जीतकर वह पहली बार संसद पहुंचीं और 2019 में भी इसी सीट से जीत दर्ज की। राजनीति में सक्रिय होने के बाद फिल्मों में उनका काम काफी कम हो गया और 2014 में रिलीज हुई ‘खूबसूरत’ उनकी आखिरी बड़ी फिल्मों में शामिल रही।
‘राजनीति के लिए मां का दिल बहुत साफ है’
सिकंदर खेर के मुताबिक, किरण खेर का स्वभाव राजनीति के लिए बहुत सीधा है। उन्होंने कहा कि उनकी मां का दिमाग सरल है और वह किसी तरह की चालाकी या कपट नहीं रखतीं।
सिकंदर का मानना है कि राजनीति में सफल होने के लिए कई बार बेहद सतर्क और रणनीतिक होना पड़ता है। उनके मुताबिक, सियासत ऐसी जगह है जहां अपने ही लोग कब पीछे से वार कर दें, इसका भरोसा नहीं होता। उनका कहना है कि राजनीति का यह पेचीदा और थका देने वाला माहौल किरण खेर के स्वभाव से मेल नहीं खाता।
चंडीगढ़ में रहकर निभाई सांसद की जिम्मेदारी
सिकंदर ने बताया कि उनकी मां ने अपने संसदीय क्षेत्र के लिए पूरी लगन से काम किया और सांसद की जिम्मेदारियां निभाने के लिए चंडीगढ़ में रहना भी शुरू किया था। लेकिन उनके मुताबिक, यह जिम्मेदारी शारीरिक और मानसिक रूप से काफी थकाने वाली होती है।
उन्होंने कहा कि राजनीति में लोगों को खुश रखने के लिए कई बार ऐसा व्यवहार करना पड़ता है, जो उनकी मां के स्वभाव में नहीं है। सिकंदर का मानना है कि किरण खेर ने अपने क्षेत्र के लोगों के लिए अच्छा काम किया, लेकिन अब उन्हें रोजाना बढ़ते तनाव से कुछ समय के लिए दूरी बनानी चाहिए और दोबारा अभिनय की दुनिया में लौटना चाहिए।
सिकंदर चाहते हैं मां के साथ पर्दे पर आएं
सिकंदर खेर और किरण खेर ने अभी तक किसी फिल्म में साथ काम नहीं किया है। सिकंदर की इच्छा है कि दोनों को जल्द ही किसी अच्छी कहानी में साथ काम करने का मौका मिले।
उन्होंने बताया कि कई बार निर्माताओं ने उनके और उनके पिता अनुपम खेर को साथ लेकर फिल्म बनाने की कोशिश की, लेकिन किरण खेर और सिकंदर के लिए अब तक ऐसा कोई प्रोजेक्ट सामने नहीं आया, जो उन्हें पसंद आए। उनका मानना है कि अगर कहानी और किरदार मजबूत हों तो असली मां-बेटे की जोड़ी को पर्दे पर देखना दर्शकों के लिए भी दिलचस्प अनुभव होगा।
16 साल की उम्र में ‘देवदास’ के सेट पर पहुंचे थे सिकंदर
सिकंदर खेर ने अपनी शुरुआती जिंदगी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि महज 16 साल की उम्र में उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘देवदास’ में सहायक निर्देशक के तौर पर काम किया था।
सिकंदर के मुताबिक, जब संजय लीला भंसाली किरण खेर को फिल्म का प्रस्ताव देने उनके घर पहुंचे थे, तब उन्होंने खुद भी उनके साथ काम करने की इच्छा जताई। भंसाली ने उन्हें अगले ही दिन से आने के लिए कहा और इसके बाद सिकंदर ने फिल्म के निर्माण की शुरुआत से लेकर उसके प्रीमियर तक करीब ढाई साल काम किया।
अब सिकंदर खेर की इच्छा है कि वह पर्दे के पीछे काम करने के उस पुराने अनुभव से आगे बढ़ते हुए अपनी मां किरण खेर के साथ बतौर कलाकार स्क्रीन साझा करें।