उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान, सपा ने दो नाम किए घोषित, तीसरे उम्मीदवार को लेकर बढ़ी सियासी हलचल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाला चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी अपने-अपने तय कोटे से अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं। ऐसे में चुनाव निर्विरोध होने के बजाय मतदान की स्थिति बन सकती है। खास बात यह है कि समाजवादी पार्टी ने अपने दो उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, लेकिन तीसरे प्रत्याशी को लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है।
सूत्रों के मुताबिक, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीसरे उम्मीदवार के नाम पर फैसला कर लिया है और नामांकन की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। हालांकि पार्टी फिलहाल बीजेपी के कदम पर नजर रखे हुए है। माना जा रहा है कि बीजेपी अपने उम्मीदवारों की संख्या और नाम स्पष्ट करने के बाद ही सपा अपने तीसरे प्रत्याशी का आधिकारिक ऐलान करेगी।
क्यों अहम है सपा का तीसरा उम्मीदवार?
राज्यसभा चुनाव के मौजूदा गणित में सपा के लिए तीसरे उम्मीदवार का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। पार्टी पहले ही वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव और रिलायंस समूह के कंसल्टेंट धनराज नाथवानी को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है।
अब तीसरे नाम को लेकर पार्टी रणनीतिक तौर पर आगे बढ़ रही है। सपा की कोशिश है कि बीजेपी के उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर सामने आने के बाद अपने प्रत्याशी का ऐलान किया जाए, ताकि चुनावी गणित के मुताबिक रणनीति बनाई जा सके।
पार्टी सूत्रों का दावा है कि तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए जरूरी अतिरिक्त मत जुटाने को लेकर भी बातचीत चल रही है। सपा का दावा है कि उसके साथ मौजूद विधायकों के समर्थन के अलावा कुछ अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी और इसके लिए सत्ताधारी गठबंधन के कुछ विधायकों से संपर्क किया जा रहा है।
बीजेपी ने बढ़ाया सस्पेंस
राज्यसभा चुनाव में बीजेपी की रणनीति पर भी सभी की नजर है। अगर बीजेपी अपने निर्धारित हिस्से के उम्मीदवारों तक सीमित रहती है और सपा भी केवल दो प्रत्याशी उतारती है, तो 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो सकता है।
लेकिन दोनों में से किसी एक दल ने भी अतिरिक्त उम्मीदवार उतारा तो मुकाबला मतदान तक जाएगा। यही वजह है कि सपा बीजेपी के अंतिम कदम का इंतजार कर रही है।
36 वोट का है जीत का आंकड़ा
उत्तर प्रदेश में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए एक उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के 36 वोट की जरूरत होगी। विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या के आधार पर राज्यसभा की 10 सीटों का चुनावी गणित तैयार होगा।
सपा का दावा है कि उसके मौजूदा विधायकों के मतों को जोड़ने के बाद तीसरे उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए उसे सीमित संख्या में अतिरिक्त मतों की जरूरत होगी। पार्टी इसी कमी को पूरा करने के लिए दूसरे दलों और सत्ताधारी गठबंधन के कुछ विधायकों पर नजर रख रही है।
6 अक्टूबर को खत्म होगा इंतजार
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि मतदान 16 अक्टूबर को होगा। इसलिए नामांकन की आखिरी तारीख तक तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी कि चुनाव निर्विरोध होगा या फिर विधानसभा में वोटिंग के जरिए राज्यसभा की सीटों का फैसला होगा।
फिलहाल सियासी निगाहें बीजेपी की अगली चाल और अखिलेश यादव के तीसरे उम्मीदवार के नाम पर टिकी हैं। अगर दोनों खेमे अतिरिक्त प्रत्याशी उतारते हैं, तो उत्तर प्रदेश का यह राज्यसभा चुनाव सिर्फ संख्या का खेल नहीं रहेगा, बल्कि क्रॉस-वोटिंग और प्रथम वरीयता मतों के जरिए एक बड़ा सियासी मुकाबला बन सकता है।