याचिकाओं में CEC के निलंबन से लेकर SIR से जुड़े फैसलों को रद्द करने की मांग, दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का भी हवाला
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ताओं ने इसे चुनाव आयोग के सामूहिक निर्णय लेने के सिद्धांत के खिलाफ बताया है।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ करेगी। याचिकाएं राकेश कुमार सिंह और शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल की गई हैं।
क्या है पूरा विवाद?
मामले का केंद्र चुनाव आयोग में फैसले लेने की प्रक्रिया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि SIR से जुड़े कई फैसले, दिशानिर्देश और तकनीकी बदलाव अन्य दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी या सहमति के बिना किए गए।
यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद और गहरा गया, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी।
हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग का कहना है कि उसके आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं और उन्हें पूरी वैधानिक मान्यता प्राप्त है।
याचिका में CEC को निलंबित करने की मांग
राकेश कुमार सिंह की याचिका में मांग की गई है कि मामले की अंतिम सुनवाई होने तक ज्ञानेश कुमार को CEC के पद पर काम करने से रोका जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इससे चुनाव आयोग के बहुसदस्यीय स्वरूप को बनाए रखा जा सकेगा।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि इस दौरान चुनाव आयोग का काम दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति से संचालित किया जाए। इसके अलावा नियुक्ति प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका वाले तंत्र की मांग भी उठाई गई है।
Article 324 को लेकर क्या है सवाल?
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए कहा है कि चुनावों की निगरानी, दिशा और नियंत्रण का अधिकार केवल मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यक्तिगत अधिकार नहीं है, बल्कि यह चुनाव आयोग की संस्था को दिया गया है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि क्या CEC अकेले ऐसे फैसले ले सकते हैं, जिनका अधिकार कानून और संविधान के तहत पूरे चुनाव आयोग को प्राप्त है।
SIR पर भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
याचिकाओं में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़े फैसलों और कार्रवाई को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जिन फैसलों को लेकर प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं, उन्हें वैधानिक और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना लागू किया गया।
कुछ याचिकाओं में SIR और उससे जुड़े फैसलों को अमान्य घोषित करने तथा कथित अनधिकृत कार्रवाइयों को वापस लेने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में आज किन सवालों पर नजर?
आज की सुनवाई में मुख्य रूप से तीन मुद्दे अहम रहेंगे—
पहला, क्या मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव आयोग के सामूहिक अधिकार वाले मामलों में अकेले फैसला ले सकते हैं?
दूसरा, क्या SIR से जुड़े विवादित फैसलों में अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति जरूरी थी?
तीसरा, क्या मामले की सुनवाई लंबित रहने तक CEC को पद से हटाने या निलंबित करने जैसी अंतरिम राहत दी जा सकती है?
सुप्रीम कोर्ट का रुख इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की संस्थागत कार्यप्रणाली और उसकी बहुसदस्यीय व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकता है।