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UP में भ्रष्टाचार के आरोप में दो अधिकारी सस्पेंड

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोप में दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।

ट्रांसफर सीज़न के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध वसूली और कमीशनखोरी के गंभीर आरोपों में व्यावसायिक शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक और प्रधान सहायक (बाबू) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम और निदेशक (प्रशा.) अभिषेक सिंह के आदेश पर हुई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे महकमे में खलबली मची हुई है।

ट्रांसफर के नाम पर ’10 प्रतिशत कमीशन’ का खेल, ऐसे फंसे साहब



सहायक निदेशक धीरेंद्र झा पर गाज : व्यावसायिक शिक्षा विभाग के प्रशिक्षण निदेशालय में तैनात सहायक निदेशक धीरेंद्र कुमार झा पर ट्रांसफर सीज़न का फायदा उठाकर मोटी रकम वसूलने और हर काम में ’10 फीसदी कमीशन’ मांगने का सीधा आरोप है। प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने उन्हें निलंबित करते हुए निलंबन अवधि के लिए देवीपाटन मंडल में अटैच कर दिया है।

पद का दुरुपयोग: दोनों अधिकारियों पर अपने शासकीय पद का दुरुपयोग करने, वित्तीय अनियमितताएं बरतने और पूरी व्यवस्था को धूमिल करने के बेहद गंभीर आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं।

‘शिकायतवीर बाबू’ का खेल खत्म; उत्पीड़न और धार्मिक भेदभाव का भी आरोप

इस पूरे रैकेट में विभाग का प्रधान सहायक (हेड क्लर्क) इमरान अहमद भी बराबर का हिस्सेदार पाया गया है, जिसे निदेशक (प्रशिक्षण) अभिषेक सिंह ने सस्पेंड किया है। इमरान अहमद की कार्यप्रणाली को लेकर जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:

ब्लैकमेलिंग का मास्टरमाइंड: आरोपी बाबू इमरान अहमद के बारे में जांच में सामने आया है कि वह एक शातिर गिरोह की तरह (सिंडिकेट बनाकर) काम करता था।

आरोपों के मुताबिक वह पहले खुद ही अन्य फर्जी नामों से विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ झूठी शिकायतें भेजता था। बाद में, उसी शिकायत को रफा-दफा करने और फाइल दबाने के एवज में संबंधित कर्मचारियों से मोटी रकम ऐंठता था।

इसके अलावा, इमरान अहमद पर कार्यालय के भीतर अन्य कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न करने, गिरोहबंदी करने और धार्मिक भेदभाव करने के भी बेहद संवेदनशील और गंभीर आरोप लगे हैं।

सचिवालय और निदेशालय के गलियारों में चर्चा है कि इस वसूली खेल की भनक सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी थी। सीएमओ के सख्त निर्देश के बाद ही दोनों के खिलाफ गोपनीय जांच बैठाई गई और सबूत मिलते ही बिना किसी देरी के सस्पेंशन का हंटर चला दिया गया। सरकार के इस कड़े कदम से साफ है कि आने वाले दिनों में तबादला प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने के लिए कुछ और बड़े प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।

news desk

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