साल 2017 के जून महीने में 17 वर्षीय एक किशोरी ने आरोप लगाया कि एक प्रभावशाली नेता ने उसे घर बुलाकर दुष्कर्म किया। आरोप सामने आने के बाद मामला लगातार गंभीर होता चला गया। पीड़िता के परिवार का आरोप था कि आरोपी की राजनीतिक पहुंच के चलते न केवल मामले को दबाने की कोशिश की गई, बल्कि पीड़िता के पिता को भी उल्टे जेल भेज दिया गया।
आठ अप्रैल 2018 को किशोरी ने लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया। उसी दिन रात में पीड़िता के पिता की अचानक तबीयत बिगड़ गई और जिला अस्पताल में उनकी मौत हो गई। इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया।
इस प्रकरण में तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर अपनी राजनीतिक पहुंच का दुरुपयोग कर जांच को प्रभावित करने के आरोप लगे। पीड़िता के परिवार पर दुखों का सिलसिला यहीं नहीं थमा। बाद में एक सड़क हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की भी मौत हो गई। चाची इस मामले में अहम गवाह थीं, जिससे इस हादसे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए।
अब, पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिलने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। जमानत के विरोध में पीड़िता मंगलवार रात दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना देने पहुंची, लेकिन उस समय उसके साथ कोई परिजन मौजूद नहीं था। पुलिस ने उसे धरना स्थल से हटा दिया, जिसके बाद यह मामला फिर से लोगों के ध्यान में आ गया।
उन्नाव रेप मामले की पीड़िता ने कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिलने के बाद मीडिया से बातचीत की। पीड़िता ने कहा कि ”जब दिल्ली हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया, तो उसे इस पर विश्वास नहीं हुआ। उसके मुताबिक, इस फैसले के बाद वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गई और उसके मन में आत्महत्या जैसे विचार तक आए। पीड़िता ने बताया कि जमानत के बाद से उसके पूरे परिवार में डर और असुरक्षा का माहौल है”।
सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा पीड़िता का परिवार
पीड़िता ने स्पष्ट किया कि वह हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। उसने कहा कि फिलहाल एक सप्ताह के लिए सुप्रीम कोर्ट बंद है, लेकिन अदालत खुलते ही उनका परिवार उच्चतम न्यायालय का रुख करेगा। पीड़िता ने भरोसा जताया कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा।
मां ने जताया डर, की न्याय की गुहार
इस मामले में जब पीड़िता की मां से बात की गई, तो उनका दर्द साफ झलकता नजर आया। उन्होंने कहा कि कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर रोक लगने और जमानत मिलने के बाद से पूरा परिवार डर के साये में जी रहा है। भावुक होते हुए उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि उन्हें सिर्फ न्याय चाहिए और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ की गुहार लगाई।
इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को कुछ शर्तों के साथ जमानत प्रदान की है। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने आदेश सुनाते हुए कहा कि सजा को फिलहाल निलंबित किया जा रहा है।
कोर्ट के 53 पन्नों के विस्तृत आदेश में जमानत दिए जाने के आधार को स्पष्ट किया गया है। आदेश के अनुसार, प्रथम दृष्टया सेंगर के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत एग्रेवेटेड पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट का अपराध स्थापित नहीं किया गया था। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने सजा निलंबित करते हुए उन्हें जमानत देने का फैसला किया।
कुल मिलाकर इस मामले में भले ही कुलदीप सेंगर को राहत मिल गई लेकिन पीडि़त परिवार का जख्म अब भी ताजा है।
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