बांग्लादेश में चुनाव चल रहे हैं और गुरुवार को वोटिंग हो रही है। इस वोटिंग में लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। 13वें संसदीय चुनाव में किसकी सरकार बनेगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन बांग्लादेश के वोटर चाहते हैं कि नई सरकार भारत के साथ अच्छे रिश्ते कायम करे ताकि उनका देश फिर से तरक्की की राह पर लौट सके।
बांग्लादेश के आम चुनाव में फर्स्ट-टाइम वोटर्स में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। 2024 में हुए आंदोलन में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। पहली बार मतदान करने वाली नुसरत ने भी अपना वोट डाला।
बांग्लादेश की संसद, जिसे जातीय संसद कहा जाता है, में कुल 350 सदस्य होते हैं, जिनमें से 300 सीटों पर ही चुनाव होता है। हर सांसद का कार्यकाल पांच साल का होता है, ठीक भारत की तरह। हर निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता अपने उम्मीदवार को वोट देते हैं और सबसे अधिक वोट पाने वाला उम्मीदवार जीत जाता है।
बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं और इनका चुनाव जनता द्वारा नहीं किया जाता। इसके बजाय चुने हुए 300 सांसद इन सीटों को हर पार्टी की मिली सीटों की संख्या के आधार पर भरते हैं।
सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को 300 सीधे चुनी हुई सीटों में से कम से कम 151 सीटें जीतनी होती हैं। महिलाओं के लिए आरक्षित 50 सीटें सरकार बनाने में सीधे शामिल नहीं होती हैं।
इन सीटों का आवंटन इस आधार पर किया जाता है कि चुनाव में प्रत्येक पार्टी को कितनी सीटें मिली हैं। इसके बाद पार्टी अपने सांसदों द्वारा इन महिला सीटों के लिए प्रतिनिधियों का चयन करती है। भारत और पाकिस्तान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि भारत में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की बात कही गई है, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।
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