ईरान द्वारा होर्मुज़ स्ट्रेट बंद किए जाने के बाद विश्वभर में तेल और गैस की आपूर्ति संकट में आ गई है। इससे तेल और गैस की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इस वजह से अमेरिका की मुश्किलें बढ़ रही हैं और वह किसी भी तरह से होर्मुज़ स्ट्रेट को खुलवाना चाहता है।
सबसे अहम बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ईरान को पूरी तरह से तबाह कर दिया है और उसकी सैन्य क्षमता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। लेकिन इसके बावजूद, ईरान का पलटवार काफी घातक साबित हो रहा है और ट्रंप के सभी दावों की पोल खुलती नजर आ रही है।
ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार अन्य देशों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। ट्रंप, जिन्होंने ईरान की नेवी और एयरफोर्स को समाप्त करने का दावा किया था, अब होर्मुज़ स्ट्रेट को खुलवाने के लिए अन्य देशों से सैन्य हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को ट्रंप ने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर उनकी सात देशों के साथ बातचीत चल रही है। यह बयान उनके उस आह्वान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से कहा कि वे होर्मुज़ स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजें। इसके अलावा, उन्होंने नाटो देशों को चेतावनी दी कि अगर नाटो देश उनकी बातों को अनदेखा करते रहे, तो नाटो का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने सालों से होर्मुज़ स्ट्रेट की रक्षा की है, लेकिन अब इस मार्ग की सुरक्षा में अन्य देशों की जरूरत अमेरिका से ज़्यादा है। उनका कहना है कि अमेरिका को इस रास्ते से केवल 1% तेल मिलता है, जबकि चीन जैसे देश लगभग 90% तेल इसी मार्ग से प्राप्त करते हैं। इसलिए उन्हें सुरक्षा में मदद करनी चाहिए।
ट्रंप की अपील पर कोई देश तैयार नहीं
ट्रंप के अनुसार, उनके होर्मुज़ स्ट्रेट मिशन में 7 देशों से बात हो रही है, लेकिन अभी तक कोई देश अमेरिका का मध्य पूर्व में सैन्य सहयोग करने को तैयार नहीं हुआ है। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया ने साफ़ कहा कि ट्रंप के अनुरोध के बावजूद वह इस क्षेत्र में अपने युद्धपोत नहीं भेजेगा।
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने पहले खाड़ी के देशों जैसे सऊदी अरब, UAE और कतर से भी ईरान पर सैन्य कार्रवाई की अपील की थी, लेकिन इन देशों ने डिफेंसिव नीति अपनाई। दो हफ्ते पहले UK के प्रधानमंत्री से बात के दौरान भी ब्रिटेन ने अपने दो विमान वाहक जहाज़ मदद के लिए भेजने में हिचकिचाहट दिखाई। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका “याद रखेगा” कि किन देशों ने ज़रूरत के समय सहयोग नहीं किया।
NATO देशों से मदद की अपील
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अन्य देशों से होर्मुज़ की निगरानी में मदद मांग रहा है और उन्हें उम्मीद है कि कई देश इसमें सहयोग करेंगे। उन्होंने इसे उस तरह के सहयोग से तुलना की, जैसा अमेरिका NATO और यूक्रेन को देता है। उनका कहना है कि यह काम आसान है क्योंकि ईरान की ताकत अब कम हो गई है।
ईरान को कमजोर करने का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के पास अब बहुत कम मिसाइलें और ड्रोन बचे हैं और अमेरिका ने उनके नए हथियार बनाने की क्षमता समाप्त कर दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमले उन जगहों पर किए जा रहे हैं जहां ईरान अपने ड्रोन बनाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले किए हैं, जिनमें खार्ग द्वीप शामिल है, जो ईरान का बड़ा तेल डिपो माना जाता है। ट्रंप का कहना है कि ईरान बातचीत के लिए उत्सुक था, लेकिन अभी इस पर तैयार नहीं है। उनका मानना है कि भविष्य में ईरान किसी समय बातचीत के लिए तैयार हो जाएगा।
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