बीजिंग/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा न केवल कूटनीतिक समझौतों, बल्कि तीखी बयानबाजी के लिए भी चर्चा में आ गया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा अमेरिका की ताकत पर सवाल उठाने के बाद अब ट्रंप ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने स्वीकार किया कि जिनपिंग ने अमेरिका को ‘गिरता हुआ देश’ कहा था, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी उनके नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के लिए थी।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का पलटवार: ‘स्लीपी जो’ की वजह से हुआ नुकसान
शिखर बैठक के दूसरे दिन ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक लंबा पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा:
“जब राष्ट्रपति शी ने अमेरिका को ‘गिरता हुआ देश’ कहा, तो वह 100 फीसदी सही थे। लेकिन उनका इशारा उस भारी नुकसान की ओर था जो हमें ‘स्लीपी जो बाइडेन’ के 4 साल के कार्यकाल में उठाना पड़ा। अब मेरे नेतृत्व के पिछले 16 महीनों में अमेरिका फिर से दुनिया का सबसे तेजी से उभरता हुआ देश बन गया है।”
क्या है ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ (Thucydides Trap), जिसका जिनपिंग ने किया जिक्र?
मुलाकात के दौरान जिनपिंग ने सीधे तौर पर “पतन” शब्द का सार्वजनिक इस्तेमाल भले न किया हो, लेकिन उन्होंने “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” का जिक्र कर दुनिया को चौंका दिया।
इतिहास और सिद्धांत: यह सिद्धांत हार्वर्ड के प्रोफेसर ग्राहम एलिसन ने दिया था, जो प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के नाम पर है।
- मतलब: जब एक स्थापित महाशक्ति (जैसे अमेरिका) के सामने कोई नई शक्ति (जैसे चीन) उभरती है, तो दोनों के बीच युद्ध की स्थिति अनिवार्य हो जाती है क्योंकि स्थापित शक्ति को अपने वर्चस्व के खोने का डर होता है।
- ऐतिहासिक उदाहरण: प्राचीन काल में एथेंस के उदय ने स्पार्टा के मन में डर पैदा किया था, जिसके कारण भयानक युद्ध हुआ।
जिनपिंग ने ट्रंप से पूछा, “क्या चीन और अमेरिका मिलकर इस ट्रैप से बाहर निकल सकते हैं और संबंधों का एक नया मॉडल बना सकते हैं?”
ट्रंप का दावा: जिनपिंग ने मेरी उपलब्धियों को सराहा
अपनी पोस्ट में ट्रंप ने चीन के सामने घुटने टेकने के बजाय अपनी पीठ थपथपाई। उन्होंने दावा किया कि बैठक में जिनपिंग ने रिकॉर्ड स्टॉक मार्केट, मजबूत सैन्य ताकत और अमेरिका में बढ़ते निवेश के लिए उन्हें बधाई दी। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका 2 साल पहले पतन की ओर था, लेकिन अब वह दोबारा अपनी खोई हुई शक्ति हासिल कर चुका है।
भविष्य की उम्मीद: तनाव के बीच बेहतर रिश्तों का सपना
भले ही दोनों नेताओं के बीच शब्दों की जंग जारी हो, लेकिन ट्रंप ने सकारात्मक अंत करते हुए कहा कि वे वॉशिंगटन और बीजिंग के रिश्तों को “पहले से कहीं ज्यादा मजबूत” बनाना चाहते हैं।