धार/भोपाल। धार की ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला को लेकर आए हाई कोर्ट के फैसले ने देश में एक नई वैचारिक बहस छेड़ दी है। मध्य प्रदेश के मंत्री राकेश सिंह और विपक्षी नेता असदुद्दीन ओवैसी के बयानों ने इस मुद्दे के दोनों पहलुओं को स्पष्ट कर दिया है।
धार भोजशाला केस में इंदौर हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए परिसर को मंदिर माना। जज ने कहा कि हम सभी वकीलों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने कोर्ट की सहायता की। हमने तथ्यों को देखा, ASI एक्ट को देखा। आर्कियोलॉजी एक विज्ञान है। उसके आधार पर मिले निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है। साथ ही संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों को भी देखा जाना है। यह परमार वंश के राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का केंद्र था। देवी सरस्वती का मंदिर था।
1. “करोड़ों सनातनियों की जीत”: मंत्री राकेश सिंह
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री राकेश सिंह ने हाई कोर्ट के फैसले का दिल खोलकर स्वागत किया है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की बड़ी उपलब्धि करार दिया।
- सांस्कृतिक धरोहर: सिंह ने भोजशाला को ‘माँ वाग्देवी’ का पावन मंदिर बताते हुए कहा कि राजा भोज की विरासत को अब न्याय मिला है।
- भावनाओं का सम्मान: उनके अनुसार, हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलना करोड़ों लोगों की आस्था का सम्मान है। उन्होंने अपने बयान का अंत “यतो धर्मस्ततो जयः” (जहाँ धर्म है, वहां विजय है) के उद्घोष के साथ किया।
2. “बाबरी कांड जैसी समानता”: असदुद्दीन ओवैसी का पलटवार
दूसरी तरफ, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी इस फैसले से सहमत नहीं हैं। उन्होंने इस आदेश को कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण बताया है।
- सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद: ओवैसी ने आशा जताई है कि देश की सर्वोच्च अदालत इस मामले में हस्तक्षेप करेगी और हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करेगी।
- इतिहास का हवाला: ओवैसी ने इस फैसले की तुलना बाबरी मस्जिद मामले से करते हुए कहा कि इसमें स्पष्ट समानताएं दिख रही हैं, जो चिंता का विषय हैं।
क्या है पूरा विवाद?
- स्थान: धार, मध्य प्रदेश।
- भोजशाला: हिंदू इसे वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम इसे कमाल मौला की मस्जिद बताते हैं।
- कोर्ट का आदेश: हाई कोर्ट के हालिया रुख ने हिंदुओं को पूजा के अधिकार और परिसर के एएसआई (ASI) सर्वे के पहलुओं को मजबूती दी है।
भोजशाला मामले में हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया है। धार शहर की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अराजकता या शांति भंग करने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासन की ‘अभेद’ सुरक्षा रणनीति:
- भारी पुलिस बल की तैनाती: DIG मनोज कुमार सिंह ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से जिले के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। संवेदनशील इलाकों में विशेष फ्लैग मार्च और पेट्रोलिंग की जा रही है।
- सोशल मीडिया पर ‘डिजिटल’ पहरा: कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने चेतावनी दी है कि कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी या अफवाह न फैलाए। साइबर सेल हर पोस्ट पर नजर रख रही है, और अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- जन-संवाद से शांति की पहल: प्रशासन दोनों समुदायों के वरिष्ठ और प्रभावशाली लोगों के संपर्क में है। उनसे अपील की गई है कि वे अपने-अपने स्तर पर लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील करें।