पटना: बिहार में वाहन चालकों को जल्द अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ सकता है। राज्य सरकार ने नेशनल हाईवे की तर्ज पर अब स्टेट हाईवे पर भी टोल टैक्स वसूलने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत कार, जीप, टेंपो, बस, ट्रक और मल्टी एक्सल वाहनों के लिए अलग-अलग टोल दरें निर्धारित की गई हैं।
राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 29 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई, जिनमें राज्य सरकार के स्वामित्व वाली सड़क अवसंरचनाओं पर टोल टैक्स वसूली का प्रस्ताव भी शामिल है। नई व्यवस्था के तहत स्टेट हाईवे, बड़े पुलों और बाइपास का उपयोग करने वाले वाहनों से श्रेणीवार शुल्क लिया जाएगा।
फिलहाल सरकार ने उन सड़कों की अंतिम सूची जारी नहीं की है, जहां टोल टैक्स वसूला जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार विभिन्न स्टेट हाईवे पर यातायात और वाहन भार का अध्ययन करा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद तय किया जाएगा कि किन मार्गों पर टोल प्लाजा स्थापित किए जाएंगे। भविष्य में बनने वाले एक्सप्रेस-वे को भी इस व्यवस्था के दायरे में लाया जा सकता है।
नई नियमावली के अनुसार अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए प्रति किलोमीटर टोल शुल्क निर्धारित किया गया है।
निर्धारित दरों के अनुसार यदि कोई कार या जीप स्टेट हाईवे पर 100 किलोमीटर की यात्रा करती है तो उसे 125 रुपये टोल देना होगा। इसी दूरी के लिए छोटे व्यावसायिक वाहनों से 200 रुपये, बस और ट्रक से 425 रुपये तथा मल्टी एक्सल भारी वाहनों से 810 रुपये तक शुल्क वसूला जाएगा।
सरकार ने टोल संग्रहण को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। इसके लिए फास्टैग और अन्य स्वीकृत इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों को प्राथमिकता दी जाएगी। बिना फास्टैग वाले वाहनों से सामान्य दर से अधिक शुल्क लिया जाएगा।
नई नियमावली में ओवरलोड वाहनों के खिलाफ भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले वाहनों से सामान्य टोल के अलावा अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क वसूला जाएगा।
सरकार ने नियमित और स्थानीय यात्रियों के लिए विशेष प्रावधान भी किए हैं। उन्हें रियायती पास, छूट और मल्टीपल ट्रिप जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं, ताकि रोजाना यात्रा करने वालों पर अतिरिक्त बोझ कम हो।
राज्य में वर्तमान में स्टेट हाईवे का नेटवर्क 3600 किलोमीटर से अधिक है। हालांकि नई टोल व्यवस्था कब से लागू होगी, इसकी आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। सड़कों के अध्ययन और यातायात रिपोर्ट के बाद इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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