लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। एक ही दिन में पदोन्नति और तबादलों की बड़ी कार्रवाई ने पुलिस विभाग में हलचल बढ़ा दी है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की विभागीय पदोन्नति समिति की सिफारिश पर राज्य के 29 पीपीएस अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में पदोन्नत कर दिया गया है। इसके साथ ही 14 पुलिस एवं प्रतिसार निरीक्षकों को पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर प्रोन्नति मिली है।
विभागीय पदोन्नति समिति की संस्तुति के बाद 29 प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) अधिकारियों को आईपीएस कैडर में शामिल किया गया है। इस निर्णय को राज्य पुलिस प्रशासन में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों को जल्द नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।
राज्य सरकार ने विभागीय पदोन्नति समिति की सिफारिश के आधार पर 14 पुलिस एवं प्रतिसार निरीक्षकों को पुलिस उपाधीक्षक पद पर पदोन्नत किया है। पदोन्नति पाने वालों में विभिन्न जिलों और इकाइयों में तैनात अधिकारी शामिल हैं। इनमें आगरा, भदोही, प्रतापगढ़, मुरादाबाद, गोंडा, बलरामपुर, बुलंदशहर, लखनऊ, फिरोजाबाद, मिर्जापुर और वाराणसी समेत कई जिलों में तैनात निरीक्षकों के नाम शामिल हैं।
पुलिस मुख्यालय ने लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात 194 निरीक्षकों का व्यापक तबादला आदेश जारी किया है। इस तबादला सूची में विभिन्न कमिश्नरेट, जोन और जिलों में कार्यरत निरीक्षक शामिल हैं। तबादलों के जरिए प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर, मेरठ, बरेली और आगरा जोन में बड़ी संख्या में अधिकारियों की नई तैनाती की गई है।
जारी तबादला सूची में लखनऊ जोन और लखनऊ कमिश्नरेट के 12 निरीक्षक भी शामिल हैं। इनमें कई अधिकारियों को प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर जोन में भेजा गया है। वहीं अन्य जोनों से भी अधिकारियों को लखनऊ जोन और लखनऊ कमिश्नरेट में नई जिम्मेदारी दी गई है।
तबादला आदेश के तहत लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर नगर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, आगरा और वाराणसी कमिश्नरेट से बड़ी संख्या में निरीक्षकों को अन्य जोनों और कमिश्नरेट में स्थानांतरित किया गया है। इसके अलावा सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, अमरोहा, चित्रकूट और बांदा समेत कई जिलों के निरीक्षक भी तबादला सूची में शामिल हैं।
एक साथ बड़ी संख्या में पदोन्नति और तबादलों को पुलिस विभाग में प्रशासनिक सक्रियता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे विभिन्न इकाइयों में कार्यकुशलता बढ़ाने और प्रशासनिक संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी।
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