नई दिल्ली: वजन कम करने की कोशिश करने वाले लोगों को अक्सर कई तरह की सलाह सुनने को मिलती है। कोई भूखे रहने को वजन घटाने का तरीका बताता है तो कोई कार्बोहाइड्रेट पूरी तरह छोड़ने की सलाह देता है। इसी तरह ज्यादा पसीना आने को फैट तेजी से कम होने से जोड़ दिया जाता है। लेकिन वजन घटाने से जुड़ी ऐसी कई बातें सिर्फ आम गलतफहमियां हैं, जिन्हें सच मानने से लोग जरूरत से ज्यादा सख्त डाइटिंग करने लगते हैं।
HereNow Official की सीनियर फिटनेस और लाइफस्टाइल कंसल्टेंट साधना सिंह ने Indianexpress.com से बातचीत में वजन घटाने से जुड़े 10 आम मिथकों और उनकी सच्चाई के बारे में बताया है। जानिए कौन-सी बातें आपको वजन घटाने के दौरान गुमराह कर सकती हैं।
वजन घटाने के लिए खाना छोड़ना जरूरी नहीं है। जरूरत से ज्यादा कैलोरी कम करने पर मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है और मसल्स लॉस की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में वजन घटाने का यह तरीका लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रहता।
कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देने वाले जरूरी पोषक तत्वों में शामिल हैं। वजन बढ़ने की समस्या सिर्फ कार्ब्स की वजह से नहीं होती। उनकी मात्रा और खाने में शामिल कार्बोहाइड्रेट की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है।
वर्कआउट के दौरान ज्यादा पसीना आने का मतलब यह नहीं है कि शरीर उतनी ही तेजी से फैट जला रहा है। पसीना मुख्य रूप से शरीर से फ्लूइड निकलने की प्रक्रिया है, जबकि फैट लॉस समय के साथ कैलोरी डेफिसिट से होता है।
सिर्फ किसी एक हिस्से की एक्सरसाइज करके उसी जगह का फैट कम करना संभव नहीं है। उदाहरण के लिए पेट की एक्सरसाइज करने से केवल पेट की चर्बी घटने की गारंटी नहीं होती। शरीर में फैट लॉस आमतौर पर ओवरऑल तरीके से होता है।
मील स्किप करने से बाद में भूख ज्यादा लग सकती है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खाना खा सकता है, जिससे खाने का संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए वजन कम करने के लिए लगातार खाना छोड़ना सही रणनीति नहीं मानी जाती।
हर तरह के फैट को डाइट से निकाल देना सही नहीं है। हेल्दी फैट्स शरीर के हार्मोन फंक्शन के लिए जरूरी होते हैं और पेट भरा हुआ महसूस कराने में भी मदद करते हैं। इसलिए डाइट में इनकी संतुलित मात्रा बनाए रखना जरूरी है।
कार्डियो वजन घटाने की प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसके साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी महत्वपूर्ण है। यह मसल्स बनाने और मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करने में मदद करती है। इसलिए केवल कार्डियो पर निर्भर रहने के बजाय एक्सरसाइज रूटीन में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी जगह दी जा सकती है।
वजन घटाने के लिए किसी शॉर्टकट पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। ज्यादातर नतीजे सही डाइट, नियमित ट्रेनिंग और लगातार प्रयास से जुड़े होते हैं। फैट बर्नर या सप्लीमेंट्स को वजन घटाने का अनिवार्य हिस्सा मानना सही नहीं है।
वजन घटाने के दौरान उतार-चढ़ाव होना सामान्य है। वॉटर रिटेंशन, हार्मोन और दूसरे कारणों से वजन कुछ समय के लिए बढ़ सकता है या एक ही स्तर पर बना रह सकता है। इसलिए हर दिन वजन कम न होने को प्रोग्रेस रुकने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।
वेटिंग स्केल पर दिखाई देने वाला नंबर ही प्रोग्रेस का एकमात्र पैमाना नहीं है। बॉडी कंपोजिशन, शरीर की माप और ओवरऑल हेल्थ भी वजन घटाने की प्रगति को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
साधना सिंह के मुताबिक ऐसी सलाह से सावधान रहना चाहिए जिसमें जरूरत से ज्यादा पाबंदियां लगाई जाएं, बिना किसी मेडिकल कारण के पूरे फूड ग्रुप को डाइट से हटाने की बात कही जाए या बहुत कम समय में तेजी से वजन घटाने का दावा किया जाए।
वजन घटाने के लिए बेहतर सलाह आमतौर पर संतुलित पोषण, धीरे-धीरे होने वाली प्रोग्रेस और लंबे समय तक अपनाई जा सकने वाली आदतों पर जोर देती है। इसलिए किसी भी डाइट या वेट लॉस रूटीन को शुरू करने से पहले योग्य न्यूट्रिशनिस्ट, डाइटिशियन या फिटनेस एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर है।
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