हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे की “विजय शंखनाद” रैली के बाद एक हिंदू संगठन द्वारा हिंदू संगठन विरोधी बताते हुए किए गए ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ से उत्तराखंड की राजनीति में एक नई बहस शुरू कर दी है।
इस अजीबोगरीब वाकये के बाद कांग्रेस ने इसे दलित विरोधी मानसिकता बताकर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है, तो वहीं बीजेपी ने इस पूरे घटनाक्रम से पल्ला झाड़ते हुए कांग्रेस पर ही सनातन भावनाओं को आहत करने और मामले को जातिगत रंग देने का पलटवार किया है।
मामला क्या है?
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के मुख्य आतिथ्य में एक बड़ी जनसभा का आयोजन किया गया था। रैली के समापन के ठीक बाद, ‘श्रीराम सेना’ संगठन से जुड़े कुछ लोग मैदान में पहुँचे। उन्होंने वहाँ कथित तौर पर गंगाजल का छिड़काव किया और एक ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ किया।
संगठन का तर्क था कि रैली के दौरान सनातन धर्म और देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं, जिससे वह जगह ‘अशोक’ या ‘अपवित्र’ हो गई थी और उसे शुद्ध करना जरूरी था।
‘दलित विरोधी और संकीर्ण मानसिकता’
इस घटना के सामने आते ही कांग्रेस पार्टी ने तीखा तेवर अपना लिया है। उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस कृत्य को बेहद शर्मनाक और ओछी मानसिकता करार दिया है।
कांग्रेस का आरोप लगाया है कि मल्लिकार्जुन खड़गे देश के एक वरिष्ठ और दलित समुदाय से आने वाले नेता हैं। ऐसे में उनके कार्यक्रम के तुरंत बाद मैदान का ‘शुद्धिकरण’ करना दुर्भावना से प्रेरित है और यह सीधे तौर पर दलित और पिछड़ा विरोधी सोच को उजागर करता है।
कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को लेकर कड़ा रोष जताया है और एसएसपी नैनीताल को शिकायती पत्र सौंपकर इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
यह विवाद अब महज़ एक मैदान पर हुए हवन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। जहाँ एक तरफ कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय और दलित अपमान से जोड़कर देख रही है, वहीं बीजेपी इसे कांग्रेस की तुष्टिकरण और सनातन विरोधी नीतियों का नतीजा बता रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी उबाल और अधिक बढ़ने के पूरे आसार हैं।