नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के जन्मदाता और पूर्व चेयरमैन ललित मोदी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। साल 2010 से भारत से बाहर रह रहे ललित मोदी ने अपने ऊपर लगे ‘भगोड़ा’ (Fugitive) होने के ठप्पे को सिरे से खारिज कर दिया है। समाचार एजेंसी ANI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने न केवल खुद का बचाव किया, बल्कि भारतीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और देश की न्याय व्यवस्था पर भी तीखे सवाल खड़े किए।
ललित मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि वह किसी से छिप नहीं रहे हैं और पूरी दुनिया में खुलेआम घूम रहे हैं। आइए जानते हैं उनके इस इंटरव्यू की 4 सबसे बड़ी और बेबाक बातें:
1. ‘भारत ग्लोबल सुपरपावर है, उससे छिपना मुमकिन नहीं’
इंटरव्यू के दौरान ललित मोदी ने उन दावों को बेबुनियाद बताया कि वह कानून से भाग रहे हैं। उन्होंने भारतीय अधिकारियों और मीडिया के रवैये पर तंज कसते हुए कहा:
“मैं बिल्कुल भी नहीं भाग रहा हूं। मैं पूरी दुनिया में घूम रहा हूं। अगर मैं भाग रहा होता, तो आप मुझे कहीं न कहीं पकड़ ही लेते। भारत सरकार के हाथ बहुत लंबे हैं, आप उनसे मुकाबला नहीं कर सकते और मेरा ऐसा कोई इरादा भी नहीं है। यह सरकार नहीं, बल्कि मीडिया है जो खबरें बेचने के लिए मुझे भगोड़ा कहती है।”
2. 17 साल का हिसाब: ‘देर से मिलने वाला न्याय भी एक सजा’
ललित मोदी पर आईपीएल नीलामी में धांधली, मनी लॉन्ड्रिंग और फेमा (FEMA) के उल्लंघन जैसे कई गंभीर आरोप हैं। लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब तक उनके खिलाफ कोई भी आपराधिक आरोप साबित नहीं हो सका है।
- सुस्त कानूनी प्रक्रिया पर वार: उन्होंने भारतीय अदालतों की धीमी रफ्तार पर दुख जताते हुए कहा कि भारत में मामलों की सुनवाई समय पर होती ही नहीं है। “जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड” का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देर से मिलने वाला न्याय भी अपने आप में एक सजा है।
- चुनौतीपूर्ण लहजा: ललित मोदी ने आगे कहा, “मेरे खिलाफ एक भी ठोस केस दर्ज नहीं हुआ। अगर मैं इतना ही बुरा हूं, तो जाओ और मेरे खिलाफ कोर्ट में केस साबित करके दिखाओ।”
3. ‘अब मेरी प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं, भारत क्यों आऊं?’
जब ललित मोदी से पूछा गया कि क्या वह अपना नाम साफ करने के लिए कभी भारत लौटेंगे? तो उन्होंने बेहद दोटूक जवाब दिया।
- उन्होंने कहा कि एक दौर था जब वह वतन लौटना चाहते थे, लेकिन अब उनकी प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं।
- साबित करने की जिद खत्म: ललित मोदी के मुताबिक, अब उन्हें किसी के सामने खुद को सही साबित करने की कोई जरूरत महसूस नहीं होती। उन्होंने सवाल उठाया, “अगर कुछ गलत था, तो 17 साल गुजर जाने के बाद भी मुझे आज तक किसी अदालत में पेश क्यों नहीं किया जा सका?”
क्या है असल कानूनी स्थिति? (एजेंसियों का पक्ष)
भले ही ललित मोदी खुद को क्लीन चिट दे रहे हों, लेकिन भारतीय नियामक एजेंसियां अब भी उनके पीछे लगी हुई हैं:
| जांच एजेंसी | वर्तमान कार्रवाई / आरोप |
| प्रवर्तन निदेशालय (ED) | आईपीएल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध फंड ट्रांसफर की जांच। |
| विदेश मंत्रालय (MEA) | भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के तहत ललित मोदी के प्रत्यर्पण (Extradition) की कोशिशें। |
| BCCI | अनुशासनहीनता और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के बाद पहले ही आजीवन प्रतिबंध लगा चुका है। |
ललित मोदी का यह इंटरव्यू साफ तौर पर यह दिखाता है कि वह कानूनी बारीकियों का फायदा उठाकर खुद को सुरक्षित मान रहे हैं, जबकि भारतीय एजेंसियां अब भी कागजी दांवपेंचों में उलझी हुई हैं। अब देखना यह है कि विदेश मंत्रालय और ED इस खुले चैलेंज का क्या जवाब देते हैं।