नई दिल्ली: आमतौर पर नवंबर का महीना सर्दियों की शुरुआत का संकेत देता है, लेकिन इस बार देश के ज्यादातर हिस्सों में लोगों को गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने नवंबर का मासिक पूर्वानुमान जारी करते हुए अधिकतम और न्यूनतम, दोनों तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना जताई है। इसके साथ ही देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है।
मौसम विभाग के मुताबिक, हिमालयी राज्यों के कुछ इलाकों को छोड़कर देश के ज्यादातर हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है। वहीं, रात के तापमान में भी सामान्य के मुकाबले ज्यादा गर्मी रहने की आशंका है। हालांकि, मध्य और पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान सामान्य या उससे नीचे रह सकता है।
नवंबर में कहां ज्यादा रहेगा तापमान?
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, नवंबर के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। हिमालयी राज्यों के कुछ क्षेत्रों में इससे अलग स्थिति रह सकती है। वहीं, हिमालय की तलहटी के कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहने का अनुमान है।
रात के तापमान को लेकर भी मौसम विभाग ने गर्मी का संकेत दिया है। देश के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है। हालांकि, मध्य और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य या उससे नीचे रहने की संभावना है। ऐसे में इन इलाकों में अपेक्षाकृत ठंडक महसूस हो सकती है।
नवंबर में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान
मौसम विभाग ने नवंबर में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई है। हालांकि, मध्य, उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक हो सकती है।
IMD के मुताबिक, नवंबर में पूरे देश में दीर्घावधि औसत यानी एलपीए (LPA) की करीब 77 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान है। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर नवंबर में देश की औसत बारिश का दीर्घावधि औसत 29.7 मिलीमीटर है।
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भी नवंबर के दौरान एलपीए की लगभग 77 प्रतिशत बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस क्षेत्र में नवंबर की सामान्य बारिश का दीर्घावधि औसत करीब 118.7 मिलीमीटर है।
क्या होता है दीर्घावधि औसत यानी LPA?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान में इस्तेमाल होने वाला एलपीए यानी लॉन्ग पीरियड एवरेज किसी क्षेत्र में एक निश्चित अवधि के दौरान होने वाली औसत बारिश को दर्शाता है। इसकी गणना कई दशकों के मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर की जाती है। आमतौर पर इसके लिए 30 से 50 वर्षों के आंकड़ों का इस्तेमाल होता है।
इसी औसत से तुलना करके मौसम विभाग बताता है कि किसी महीने या मौसम में बारिश सामान्य से कम, सामान्य या सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है।
प्रशांत महासागर में मजबूत अल नीनो की स्थिति
IMD ने अपने पूर्वानुमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बहुत मजबूत अल नीनो की स्थिति का भी जिक्र किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, मॉनसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा अनुमानों में नवंबर-दिसंबर के दौरान भी अल नीनो की स्थिति बहुत मजबूत बने रहने की संभावना जताई गई है।
अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से जुड़ी जलवायु स्थिति है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों के मौसम पर पड़ सकता है।
अक्टूबर में 1901 के बाद सबसे ज्यादा रहा औसत अधिकतम तापमान
नवंबर में गर्मी बने रहने की आशंका के बीच अक्टूबर के तापमान के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। IMD के अनुसार, इस साल अक्टूबर में देश का औसत अधिकतम तापमान 32.43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह 1901 के बाद अक्टूबर महीने का सबसे अधिक औसत अधिकतम तापमान है। अक्टूबर में देश का सामान्य औसत अधिकतम तापमान 31.37 डिग्री सेल्सियस रहता है।
वहीं, अक्टूबर में औसत न्यूनतम तापमान 20.83 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह 1901 के बाद अक्टूबर महीने का पांचवां सबसे अधिक औसत न्यूनतम तापमान है। इस महीने का सामान्य औसत न्यूनतम तापमान 20.01 डिग्री सेल्सियस है।
अक्टूबर के इन आंकड़ों और नवंबर के मासिक पूर्वानुमान से संकेत मिलता है कि इस बार सर्दियों की शुरुआत में तापमान में अपेक्षित गिरावट देर से महसूस हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम की स्थिति में अंतर रहने का अनुमान है।