पश्चिम बंगाल के बाहर राष्ट्रीय स्तर पर पैर पसारने की कोशिशों में जुटी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और तगड़ा झटका लगा है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की बेहद भरोसेमंद और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव (Sushmita Dev) ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
सांसदों और विधायकों की आंतरिक बगावत से पहले से ही जूझ रही टीएमसी के लिए सुष्मिता देव का यह कदम किसी बड़े सियासी भूकंप से कम नहीं है। राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को ममता बनर्जी के ‘राष्ट्रीय विस्तार’ के सपने के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे मोड़ पर आया है जब टीएमसी के कई बड़े नेता और सांसद पहले ही अलग गुट बनाने की राह पर हैं। सुष्मिता देव के इस्तीफे के मायने इन 3 बिंदुओं से समझिए:
| मुख्य विवरण | राजनीतिक अपडेट (2026) |
| इस्तीफा देने वाली नेता | सुष्मिता देव (राज्यसभा सांसद, TMC) |
| राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र | असम, पूर्वोत्तर और राष्ट्रीय स्तर (दिल्ली) |
| टीएमसी संकट का पैमाना | 20 लोकसभा सांसद और 2/3 विधायक पहले ही बागी |
| इस्तीफे का संभावित कारण | पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह और नेतृत्व से नाराजगी |
असम से आने वाली सुष्मिता देव का इस्तीफा टीएमसी के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है, क्योंकि पार्टी पहले से ही अभूतपूर्व बिखराव के दौर से गुजर रही है:
सुष्मिता देव के इस कदम के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि वह वापस कांग्रेस का दामन थाम सकती हैं या किसी अन्य राष्ट्रीय दल में शामिल हो सकती हैं। बहरहाल, उनका जाना इस बात का साफ संकेत है कि ममता बनर्जी का किला अब पूरी तरह दरक चुका है और दिल्ली से लेकर कोलकाता तक टीएमसी गंभीर अस्तित्व के संकट से गुजर रही है।
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