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राहुल-प्रियंका के कंधों पर होगी गोवा की जिम्मेदारी: 22 सितंबर से शुरू होगी ‘गोय राखोन्न यात्रा’, जानिए क्या है कांग्रेस का मास्टर प्लान!

गोवा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने वाला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी जल्द ही राज्य में ‘गोय राखोन्न यात्रा’ का जोरदार आगाज करने जा रहे हैं। आगामी 22 सितंबर से शुरू होने वाली यह बहुचर्चित यात्रा 27 दिनों तक चलेगी और राज्य की सभी 40 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी। गोवा कांग्रेस का दावा है कि राज्य में पार्टी का संगठन और जनसंपर्क मजबूत करने की दिशा में यह एक बेहद अहम महाअभियान है, जो ‘अलोकप्रिय, भ्रष्ट और नकारा बीजेपी सरकार को उखाड़ फेंकने’ के लिए उठाया गया सबसे बड़ा कदम साबित होगा।

कांग्रेस ने लगाया आरोप

मंगलवार को कांग्रेस पार्टी ने आम आदमी पार्टी (AAP) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के बीच हुए नए सियासी गठबंधन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ एक सीधा ‘एक्सचेंज ऑफर’ करार दिया है।

कांग्रेस ने कड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि यह गठबंधन आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अलग-अलग राज्यों में दोनों दलों की राजनीतिक जमीन बचाए रखने के लिए एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया है।

पार्टी का दावा है कि इस गुप्त राजनीतिक समझौते का मुख्य उद्देश्य गोवा में बीजेपी और पंजाब में आप (AAP) की राजनीतिक स्थिति को मजबूत करना और सुरक्षित करना है।

‘यह बीजेपी और आप का एक्सचेंज ऑफर है‘ – गिरीश चोडंकर

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडंकर ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, ‘गोवा फर्स्ट गठबंधन गोवा की जनता की आकांक्षाओं के खिलाफ है, जो 2027 के चुनावों में बीजेपी को चुनौती देने के लिए एक बड़े विपक्षी गठबंधन की उम्मीद कर रही थी।

आप (AAP) ने जरूर ऐसा एक्सचेंज ऑफर किया होगा, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया कि बीजेपी पंजाब चुनाव जीतने में आप की मदद करेगी, जबकि गोवा में आप बीजेपी का समर्थन करेगी।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता जनता के हितों के बजाय केवल राजनीतिक स्वार्थ के लिए गढ़ा गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले गोवा का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। एक तरफ जहाँ राहुल गांधी इस मेगा यात्रा के जरिए कांग्रेस की पुरानी जमीन को वापस पाने और बिखरे विपक्ष को साधने की जुगत में हैं, वहीं आप और जीएफपी का नया गठबंधन मुकाबले को बेहद रोमांचक और त्रिकोणीय बना रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि गोवा की जनता इन तमाम सियासी दांव-पेंचों के बीच किस पर अपना भरोसा जताती है और राज्य की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगती है।

news desk

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