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कार नहीं, बैलगाड़ी पर निकली बारात… दूल्हे ने दहेज के खिलाफ पेश की ऐसी मिसाल, देखते रह गए लोग

vineet verma
Last updated: July 15, 2026 4:46 am
vineet verma
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बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले में एक शादी अपनी सादगी और सामाजिक संदेश की वजह से चर्चा का विषय बन गई। जहां आजकल शादियों में लग्जरी कारों और भव्य इंतजामों का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं एक दूल्हा सजी-धजी बैलगाड़ी पर बारात लेकर विवाह स्थल पहुंचा। इस अनोखी पहल के जरिए उसने दहेज मुक्त विवाह का संदेश दिया और स्थानीय कुड़माली संस्कृति को बढ़ावा देने की कोशिश की।

Contents
दहेज मुक्त विवाह का दिया अनोखा संदेशलोक संगीत की धुनों पर निकली पूरी बारातदुल्हन की विदाई भी बैलगाड़ी से हुईसोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर सराहना

दहेज मुक्त विवाह का दिया अनोखा संदेश

दूल्हे ने बताया कि उसका उद्देश्य शादी को दिखावे से दूर रखते हुए समाज को दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ सकारात्मक संदेश देना था। गांव के लोगों की मदद से बैलगाड़ी को पारंपरिक अंदाज में सजाया गया, जिसने बारात में शामिल लोगों के साथ-साथ स्थानीय लोगों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

लोक संगीत की धुनों पर निकली पूरी बारात

इस विवाह की एक और खास बात यह रही कि बारात में आधुनिक डीजे की जगह कुड़माली लोक संगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज सुनाई दी। बाराती पूरे उत्साह के साथ लोक नृत्य करते हुए आगे बढ़े, जबकि शादी की सभी रस्में भी कुड़माली परंपराओं के अनुसार संपन्न कराई गईं।

दुल्हन की विदाई भी बैलगाड़ी से हुई

विवाह के बाद दुल्हन की विदाई भी उसी बैलगाड़ी से कराई गई, जिससे यह आयोजन और भी खास बन गया। इस पूरे आयोजन ने यह संदेश देने की कोशिश की कि शादी की असली खूबसूरती महंगे खर्च और दिखावे में नहीं, बल्कि परंपराओं, आपसी सम्मान और पारिवारिक मूल्यों में होती है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर सराहना

इस अनोखी शादी की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है। लोग दूल्हे की पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बता रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि विवाह का मकसद लोगों को यह संदेश देना था कि शादी का आधार दहेज या फिजूलखर्ची नहीं, बल्कि समानता, सम्मान और संस्कार होने चाहिए। कई लोगों ने उम्मीद जताई कि ऐसी पहल दहेज जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करने की दिशा में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

 

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