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लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर होगी 850; 2029 से लागू होगा महिला आरक्षण

भारत के संसदीय इतिहास में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। केंद्र सरकार ने लोकसभा की सदस्य संख्या में भारी बढ़ोतरी और महिला आरक्षण को समय से पहले लागू करने का एक मास्टरप्लान तैयार कर लिया है। इस योजना के तहत संसद के लोकसभा सदन की सीटों को वर्तमान 543 सीटों से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।

2026 का ‘विशेष सत्र’ और विधायी एजेंडा


सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है। सूत्रों के अनुसार, इस सत्र में सरकार 131वां संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक 2026 पेश करेगी। बीजेपी ने अपने सभी सांसदों के लिए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी कर उनकी सदन में उपस्थिति अनिवार्य कर दी है, जो इस विधयेक की गंभीरता को दर्शाता है।

कैसे बदल जाएगी लोकसभा?


प्रस्तावित मसौदे के अनुसार, नई लोकसभा का ढांचा कुछ इस प्रकार होगा:
• कुल सीटें: 850 (वर्तमान में 543)
• राज्यों का प्रतिनिधित्व: 815 सीटें
• केंद्र शासित प्रदेश : 35 सीटें

• महिला आरक्षण (33%): लगभग 283 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

महिला आरक्षण की अवधि प्रणाली महिलाओं के लिए यह आरक्षण प्रारंभिक रूप से 15 साल तक लागू रहेगा, यानी यह 2029, 2034 और 2039 के लोकसभा चुनावों तक प्रभावी होगा। इसके अलावा, आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी ताकि देश के हर क्षेत्र में महिलाओं को समान रूप से प्रतिनिधित्व मिल सके।


सीटों में यह लगभग 50% की वृद्धि इसलिए की जा रही है ताकि महिला आरक्षण लागू होने पर किसी भी मौजूदा पुरुष सांसद की सीट कम न हो और सदन का विस्तार जनसंख्या के हिस्से में हो सके।

आर्टिकल 82(3) में संशोधन


इस पूरे बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी आर्टिकल 82 में संशोधन है।
मौजूदा संविधान के नियम के अनुसार, लोकसभा सीटों का नया डिटरमिनेशन (परिसीमन) 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़े आने तक नहीं किया जा सकता था। इसके कारण महिला आरक्षण लागू होने में 2034 तक की देरी हो सकती थी।

सरकार आर्टिकल 82 के उस हिस्से को हटाने जा रही है जो 2026 तक सीटों को ‘फ्रीज’ रखता है। इस अमेंडमेंट के बाद, सरकार 2011 की जनगणना को ही आधार मानकर तुरंत परिसीमन कर सकेगी।

दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंता और समाधान


उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच संतुलन को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं। विपक्ष का तर्क था कि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें कम हो जाएंगी।

सरकार ने ‘आनुपातिक वृद्धि’ (प्रोपोर्शनल ग्रोथ) का रास्ता चुना है। इसके तहत सभी राज्यों की सीटों में एक समान प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी, ताकि राज्यों के बीच का वर्तमान शक्ति संतुलन प्रभावित न हो।

2029 के चुनावों पर असर


इस संशोधन का सबसे बड़ा प्रभाव 2029 के आम चुनावों पर पड़ेगा। यदि यह विधेयक इस विशेष सत्र में पारित हो जाता है, तो:

  1. 2029 चुनाव 850 सीटों पर लड़े जाएंगे।
  2. भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार संसद में एक-तिहाई महिलाएं कानून निर्माता के रूप में मौजूद होंगी।
  3. नया संसद भवन, जिसकी क्षमता 888 सदस्यों की है, पूरी तरह उपयोग में लाया जा सकेगा।

यह कदम न केवल महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाई देगा, बल्कि आधी सदी से जमी हुई संसदीय सीमाओं को भी तोड़ देगा। हालाँकि, 2011 की पुरानी जनगणना के उपयोग और परिसीमन की प्रक्रिया पर है।लोकसभा में 543 सीट से बढ़ाकर 850 सीटें करने के लिए सरकार को 2/3 बहुमत चाहिए।जो सरकार के पास नहीं है।इसलिए इस बिल पास होने पर संशय भी बरकरार है।

news desk

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