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हलषष्ठी पर क्यों नहीं खाते हल से उगा अनाज और क्यों छोड़ना पड़ता है गाय का दूध?

लखनऊ: संतान की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला हरछठ यानी हलषष्ठी व्रत इस बार 2 सितंबर, बुधवार को मनाया जाएगा। सनातन हिंदू परंपरा में इस व्रत का विशेष महत्व माना गया है। भगवान बलराम को समर्पित इस पर्व पर केवल व्रत रखना ही जरूरी नहीं माना जाता, बल्कि खान-पान और दैनिक जीवन से जुड़े कुछ नियमों का पालन भी किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ चीजों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।

हलषष्ठी पर किन चीजों से बचना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हलषष्ठी के दिन हल से जोते गए खेत में उगने वाले अनाज का सेवन नहीं किया जाता। खासतौर पर मोटे अनाज और तामसिक भोजन से दूरी रखने की बात कही गई है। इस दिन ऐसी चीजें खाने की परंपरा है, जिनकी खेती न की जाती हो। व्रत रखने वाले लोग फलाहार कर सकते हैं। पानी में उगने वाले फलों या अन्य फलाहारी चीजों को भी आहार में शामिल किया जाता है।

गाय का दूध पीना क्यों माना जाता है वर्जित?

हलषष्ठी पर गाय के दूध और उससे बनी चीजों का सेवन न करने की धार्मिक मान्यता है। इसके पीछे भगवान बलराम और गायों से जुड़ी मान्यता बताई जाती है। माना जाता है कि गाय का दूध इस दिन उसके बछड़े के लिए होना चाहिए। इसी वजह से व्रत के दौरान गाय के दूध से बनी चीजों का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता।

पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने से भी बचें

हलषष्ठी के दिन पेड़-पौधों को काटने से भी परहेज करने की मान्यता है। यह पर्व भगवान बलराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और धार्मिक परंपरा में उन्हें पशु-पक्षियों के साथ प्रकृति और वनस्पतियों से भी जुड़ा माना गया है।

इसी वजह से इस दिन पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाने की सलाह दी जाती है। मान्यता के अनुसार, सुई-धागे का इस्तेमाल करने से लेकर बाल और नाखून काटने तक से बचना चाहिए। इन नियमों को प्रकृति और जीवन के प्रति सम्मान से जोड़कर देखा जाता है।

भगवान बलराम से जुड़ा है हलषष्ठी का पर्व

हलषष्ठी उत्तर भारत में प्रमुख रूप से मनाया जाने वाला पर्व है। इसे भगवान बलराम के जन्मोत्सव के तौर पर मनाने की परंपरा है। इस दिन भगवान बलराम के प्रमुख अस्त्र हल और मूसल की पूजा करने का विधान बताया गया है।

संतान की रक्षा और उसकी लंबी उम्र की कामना से माताएं इस दिन व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यता है कि हलषष्ठी के नियमों का विधिपूर्वक पालन करने से संतान को दीर्घायु, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

vineet verma

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