नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI में बीते कुछ वर्षों में तेजी से बदलाव आया है। इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी में भले ही हर जगह साफ दिखाई न देता हो, लेकिन डिजिटल दुनिया में AI ने कई कामों का तरीका बदल दिया है। इसी बीच Tesla के CEO एलन मस्क ने AI को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि आने वाले कुछ वर्षों में AI इंसानों से ज्यादा सक्षम हो सकता है और कई मामलों में सुपर-ह्यूमन स्तर तक पहुंच जाएगा।
AI एजेंट्स को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। अब ये ऐसे कई काम करने में सक्षम हैं, जिन्हें पूरा करने में इंसानों को काफी समय लग सकता है। मस्क का मानना है कि AI की क्षमताएं जिस रफ्तार से बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए जल्द ही यह इंसानी क्षमता से आगे निकल सकता है।
एलन मस्क ने यह बात AI फर्म Vercel के CEO Guillermo Rauch की एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कही। राउच ने एक सामने आई CVE सुरक्षा खामी का जिक्र किया था, जिसकी CVSS रेटिंग 9.8 बताई गई है।
राउच के मुताबिक, OpenAI और Hugging Face जैसी कंपनियां AI एजेंट्स की क्षमताओं को लेकर बड़े दावे कर रही हैं। उनके अनुसार, AI एजेंट्स ने सिस्टम में मौजूद खामी का पता लगाने के साथ-साथ उसका फायदा उठाने की क्षमता भी दिखाई।
इसी संदर्भ में मस्क ने कहा कि वह करीब एक दशक पहले Google के सह-संस्थापक लैरी पेज के साथ भी AI की क्षमताओं और संभावित जोखिमों पर चर्चा कर चुके हैं। मस्क का कहना है कि हैकिंग के मामले में AI जल्द ही सुपर-ह्यूमन क्षमता हासिल कर सकता है।
उनके मुताबिक, इंटरनेट और डिजिटल दुनिया में AI एजेंट्स खुद सुरक्षा खामियां खोजने और उनका फायदा उठाने में सक्षम हो सकते हैं। ऐसे में जिन सिस्टम या चीजों में खामी मौजूद है, उन्हें AI बिना किसी सीधे मानवीय आदेश के भी निशाना बना सकता है। यह स्थिति भविष्य में इंसानों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
मस्क की चिंता केवल कंप्यूटर या इंटरनेट सिस्टम तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि AI का सुपर-ह्यूमन स्तर कई ऐसे क्षेत्रों में भी दिखाई दे सकता है, जहां किसी चीज को भौतिक रूप से बनाने या परमाणुओं के स्तर पर बदलाव करने की जरूरत नहीं होती।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य बिल्कुल किसी हॉलीवुड साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा होगा। मस्क की बात मुख्य तौर पर AI की बढ़ती डिजिटल क्षमताओं और उसके संभावित प्रभावों को लेकर है।
OpenAI ने CVE खामी से जुड़े मामले पर एक विस्तृत सुरक्षा रिपोर्ट भी जारी की है। कंपनी के मुताबिक, करीब 1,200 AI एजेंट्स ने आपस में बातचीत के लिए इंटरनल आर्टिफैक्ट्स सर्विस का इस्तेमाल मैसेज बोर्ड की तरह किया। इन एजेंट्स के बीच 70 हजार से ज्यादा मैसेज और फाइलें साझा की गईं।
इसके बाद करीब 700 AI एजेंट्स ने Hugging Face को निशाना बनाया। रिपोर्ट के मुताबिक, AI एजेंट्स किसी सिस्टम में मौजूद कमजोरियों का इस्तेमाल करते हुए उसके मुख्य सॉफ्टवेयर तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
AI की यही तेजी से बढ़ती क्षमता सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन रही है। सवाल यह है कि अगर AI खुद कमजोरियां पहचानने, उनसे फायदा उठाने और अलग-अलग सिस्टम के साथ काम करने में ज्यादा सक्षम हो गया, तो उसके इस्तेमाल और नियंत्रण की जिम्मेदारी कैसे तय होगी।
AI की बढ़ती क्षमता का असर सिर्फ साइबर सुरक्षा तक नहीं है। यह कंटेंट और लेखन की दुनिया को भी तेजी से बदल रहा है। अब यह पहचानना भी मुश्किल होता जा रहा है कि कोई लेख इंसान ने लिखा है या AI ने। हालांकि, शोधकर्ताओं ने कुछ ऐसे उपकरण और तकनीकें बताई हैं, जिनकी मदद से AI से तैयार की गई लिखावट की पहचान की जा सकती है।
लखनऊ: संतान की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला…
काठमांडू: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश…
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बहराइच में तेंदुए के हमले से दहशत फैल गई है। कतर्नियाघाट…
काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की पहचान सिर्फ उनकी राजनीति और अलग अंदाज तक…
पलासदेव: महाराष्ट्र के उजनी बांध में मछली पकड़ने के प्रस्तावित निजी ठेके और फ्लोटिंग सोलर…
चेन्नई: तमिलनाडु के प्रमुख मंदिरों में मंगलवार, 1 सितंबर से श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन लेकर…