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‘हमारी रोजी-रोटी मत छीनो’… उजनी बांध में पानी के अंदर उतरे सैकड़ों मछुआरे, निजी ठेके और सोलर प्रोजेक्ट के खिलाफ ‘जल समाधि’

पलासदेव: महाराष्ट्र के उजनी बांध में मछली पकड़ने के प्रस्तावित निजी ठेके और फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट के विरोध में सोमवार को सैकड़ों मछुआरे जलाशय में उतर गए। पुणे, सोलापुर और अहिल्यानगर जिलों से पहुंचे मछुआरों ने करीब दो घंटे तक ‘जल समाधि’ आंदोलन किया। प्रदर्शनकारियों ने दोनों परियोजनाओं को रद्द करने और स्थानीय मछुआरा समुदाय को पहले की तरह मछली पकड़ने का अधिकार देने की मांग की। महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में आंदोलन में हिस्सा लिया।

सुबह से ही पलासदेव स्थित उजनी बांध के कैचमेंट क्षेत्र में मछुआरों का जुटना शुरू हो गया था। बैठक के बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जलाशय के पानी में उतर गए। करीब दो घंटे तक चले आंदोलन के बाद अधिकारियों ने अगले 15 दिनों के भीतर प्रशासन के साथ बैठक कर मछुआरों की मांगों पर चर्चा का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।

बांध बना तो छिनी जमीन, मछली पकड़ना बना सहारा

महाराष्ट्र राज्य मच्छीमार संघर्ष कृति समिति के अध्यक्ष नंदकुमार नागरे ने कहा कि उजनी बांध के निर्माण के दौरान हजारों लोगों की कृषि भूमि चली गई और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए। इसके बाद किसानों और आदिवासी समुदाय के कई लोगों ने मछली पकड़ने को अपनी आजीविका का प्रमुख साधन बना लिया।

नागरे के मुताबिक, पुणे, सोलापुर और अहिल्यानगर जिलों में करीब 30 हजार लोग सीधे तौर पर या लॉजिस्टिक्स और मार्केटिंग जैसे कामों के जरिए उजनी जलाशय में मछली पकड़ने से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि यदि मछली पकड़ने का काम निजी ठेके पर दिया गया तो इसका सीधा असर स्थानीय मछुआरा समुदाय की रोजी-रोटी पर पड़ेगा।

निजी ठेका देने की योजना से क्यों नाराज हैं मछुआरे?

मछुआरा समुदाय का आरोप है कि उजनी जलाशय में मछली पकड़ने के अधिकार निजी संस्थाओं को देने की योजना से वर्षों से इस काम पर निर्भर स्थानीय लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो सकता है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जलाशय में मछली पकड़ने का अधिकार स्थानीय समुदाय के पास ही रखा जाए।

कृति समिति के उपाध्यक्ष सीताराम नागरे ने कहा कि उनकी मांग साफ है। निजी फिशिंग कॉन्ट्रैक्ट और फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट दोनों को रद्द किया जाए और स्थानीय लोगों को पहले की तरह जलाशय में मछली पकड़ने की अनुमति दी जाए।

सोलर पैनल से मछली पकड़ने और पर्यटन पर असर का डर

मछुआरों के साथ स्थानीय लोगों ने उजनी बांध के कैचमेंट क्षेत्र में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट को लेकर भी चिंता जताई है। कुंभारगांव के रहने वाले और बर्ड गाइड एवं सफारी सेवा चलाने वाले नितिन डोले ने कहा कि जलाशय में सोलर पैनल लगाए जाने से मछली पकड़ने के लिए उपलब्ध क्षेत्र सीमित हो सकता है। इससे मछुआरों की पकड़ और आमदनी दोनों प्रभावित होने की आशंका है।

डोले ने यह भी कहा कि परियोजना का असर फ्लेमिंगो और दूसरे पक्षियों को देखने के लिए आने वाले पर्यटकों पर पड़ सकता है। उनका दावा है कि जलाशय में बड़ी संख्या में सोलर पैनल लगाए जाने से नावों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इससे क्षेत्र में बर्ड-वॉचिंग से जुड़े पर्यटन को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।

अधिकारी बोले- अभी शुरुआती चरण में हैं दोनों परियोजनाएं

उजनी बांध प्रबंधन के डिप्टी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नागनाथ खडतारे ने कहा कि मछली पकड़ने का निजी ठेका और फ्लोटिंग सोलर परियोजना, दोनों अभी शुरुआती चरण में हैं। उनके मुताबिक, उजनी जलाशय में फिशरीज और दूसरी एक्वाकल्चर गतिविधियों को विकसित करने के लिए मछली पकड़ने के अधिकार देने संबंधी प्रस्ताव मांगे गए हैं। इसी प्रक्रिया के तहत ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ जारी किया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रस्ताव को मंजूरी के लिए कमिश्नर कार्यालय भेजा गया है और अभी तक किसी संस्था या कंपनी का अंतिम चयन नहीं हुआ है। फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट के संबंध में उद्योग विभाग के साथ एक समझौता ज्ञापन हुआ है, जिसके तहत जलाशय के निर्धारित क्षेत्र को परियोजना के लिए उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। हालांकि, यह परियोजना भी अभी शुरुआती चरण में ही है।

15 दिन में बैठक, मांगें नहीं मानीं तो फिर आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शन के बाद अधिकारियों ने मछुआरों को उनकी आपत्तियों और मांगों पर चर्चा के लिए अगले 15 दिनों के भीतर प्रशासन के साथ बैठक कराने का आश्वासन दिया है। इस बैठक में दोनों परियोजनाओं को लेकर मछुआरा समुदाय की चिंताओं पर चर्चा की जाएगी।

मछुआरा समुदाय ने साफ किया है कि अगर बैठक में उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। ऐसे में उजनी जलाशय में मछली पकड़ने के अधिकार और प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर परियोजना को लेकर आने वाले दिनों में विवाद और बढ़ सकता है।

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