कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत तो दे दी, लेकिन साफ कर दिया कि जांच में पूरा सहयोग करना उनकी जिम्मेदारी होगी।
यह मामला हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्तियों का दावा किया गया था। इन आरोपों के बाद मामला कानूनी मोड़ ले चुका है और अब सुप्रीम कोर्ट की शर्तों के साथ खेड़ा को अस्थायी राहत मिली है।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया। कोर्ट ने संकेत दिया कि गिरफ्तारी जरूरी नहीं है, लेकिन जांच प्रक्रिया में बाधा भी नहीं आनी चाहिए।
खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और ऐसे में गिरफ्तारी से उनकी छवि को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं, असम सरकार की तरफ से तुषार मेहता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कथित दस्तावेज फर्जी हैं और इस पूरे मामले में गहराई से पूछताछ जरूरी है।
इस केस की खास बात यह है कि पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट ने खेड़ा को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां से अब उन्हें सीमित राहत मिली है।
यह आदेश राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के मामलों में न्यायपालिका के संतुलित रुख को दिखाता है—जहां एक तरफ व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा की गई, वहीं जांच एजेंसियों के अधिकार भी बरकरार रखे गए।
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