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पश्चिम बंगाल में ‘नंदीग्राम’ जैसा सियासी घमासान: भवानीपुर की हार के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर कानूनी और सियासी जंग तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनावी नतीजों को कोलकाता हाई कोर्ट में चुनौती दी है। मंगलवार दोपहर ममता बनर्जी अचानक कोर्ट पहुंचीं, जिससे राज्य के सियासी गलियारों में हलचल मच गई है।

कोर्ट में हाई-प्रोफाइल एंट्री

ममता बनर्जी अकेले नहीं, बल्कि अपनी पार्टी के कद्दावर नेताओं के साथ कोर्ट पहुंची थीं। उनके साथ:

  • सांसद डेरेक ओ ब्रायन
  • डोला सेन
  • वरिष्ठ वकील और सांसद कल्याण बनर्जी मौजूद रहे।

ममता बनर्जी का इस तरह खुद कोर्ट पहुंचना यह साफ करता है कि वह भवानीपुर के नतीजों को लेकर कानूनी लड़ाई को अंतिम छोर तक ले जाने के मूड में हैं।

भवानीपुर का नतीजा: क्या थे आंकड़े?

भवानीपुर सीट पर इस बार पूरे देश की नजरें थीं, क्योंकि यहाँ ममता बनर्जी और उनके कभी खास रहे शुभेंदु अधिकारी (वर्तमान मुख्यमंत्री) के बीच सीधी और कांटे की टक्कर थी।

  • नतीजा: शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,104 वोटों के अंतर से शिकस्त दी।
  • चुनौती का आधार: ममता बनर्जी ने इस जीत पर सवाल उठाते हुए मतगणना में गड़बड़ी या चुनावी प्रक्रिया में खामियों की आशंका जताई है, जिसे लेकर अब हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

शुभेंदु बनाम ममता: फिर दोहराई गई नंदीग्राम की कहानी?

इससे पहले नंदीग्राम विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला था। इस बार भवानीपुर में ममता बनर्जी की हार ने टीएमसी को बड़ा झटका दिया है। शुभेंदु अधिकारी की जीत ने उन्हें बंगाल बीजेपी और अब सरकार के सबसे मजबूत चेहरे के रूप में स्थापित किया है।

विश्लेषकों का मानना है कि:

  1. ममता बनर्जी इस याचिका के जरिए शुभेंदु अधिकारी की जीत की वैधानिकता पर सवाल खड़ा करना चाहती हैं।
  2. यह कदम टीएमसी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने के लिए एक रणनीतिक मूव भी हो सकता है।

कोलकाता हाई कोर्ट अब इस चुनाव याचिका (Election Petition) पर सुनवाई करेगा। अगर कोर्ट को प्रक्रिया में कोई गंभीर कमी मिलती है, तो वह पुनर्मतगणना (Re-counting) या अन्य कानूनी कदम उठा सकता है। फिलहाल, बंगाल की जनता की नजरें हाई कोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं।

news desk

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