ईरान में जारी युद्ध का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं, जबकि ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है। ऐसे में यह संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा। इस बीच ईरान ने Strait of Hormuz पर अपना सख्त नियंत्रण स्थापित कर लिया है, जिससे वहां से तेल की आपूर्ति करना अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
इसका नतीजा यह हुआ है कि दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
युद्ध के इस असर का प्रभाव शेयर बाजारों पर भी साफ देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि गुरुवार की भारी गिरावट के बाद शुक्रवार, 13 मार्च को भी बाजार लाल निशान में ही खुला। कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बाजार खुलते ही BSE Sensex और Nifty 50 दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में चारों ओर बिकवाली का माहौल दिखाई दिया।
शुक्रवार सुबह शेयर बाजार की शुरुआत भी गिरावट के साथ हुई। सुबह करीब 9:19 बजे BSE Sensex 611.65 अंक यानी 0.80% टूटकर 75,422.77 के स्तर पर आ गया। वहीं Nifty 50 में भी 186.40 अंकों (0.79%) की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,452.75 पर ट्रेड करता दिखाई दिया।
गुरुवार को निवेशकों को बड़ा नुकसान
इससे पहले गुरुवार, 12 मार्च का कारोबारी दिन भी बाजार के लिए बेहद निराशाजनक रहा था। उस दिन सेंसेक्स 829.29 अंक गिरकर 76,034.42 के स्तर पर बंद हुआ था। इस भारी गिरावट के चलते एक ही दिन में निवेशकों की करीब 2 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई।
बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ाने में विदेशी निवेशकों की भूमिका भी अहम रही। आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी Foreign Institutional Investors ने गुरुवार को भारतीय बाजार से करीब 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना रहा।
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