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वेनुजुएला और ईरान के बाद क्यूबा अगला निशाना? भूख और अंधेरे के बीच ट्रंप के सामने झुकने का दबाव

अमेरिका द्वारा ईरान पर लगातार हमलों के बीच अब उसकी नजर एक और देश पर टिक गई है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी रणनीति अक्सर उन देशों पर दबाव बनाने की होती है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं या गंभीर संकट से जूझ रहे होते हैं।

डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों को लेकर भी कई बार यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने आर्थिक और कूटनीतिक दबाव के जरिए विरोधी देशों को झुकाने की रणनीति अपनाई। अमेरिका ने पहले Venezuela पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे और Iran के खिलाफ भी इसी तरह की नीति अपनाई थी।

हालांकि ईरान के मामले में स्थिति पूरी तरह अमेरिका के पक्ष में नहीं रही और ईरान की ओर से कड़े पलटवार ने हालात को और जटिल बना दिया। ऐसे में अब अमेरिका को इस टकराव के बीच कूटनीतिक रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं।

इसी बीच खबरें हैं कि ईरान के बाद अमेरिका की नजर अब Cuba पर है। माना जा रहा है कि कड़े आर्थिक और राजनीतिक दबाव के जरिए वहां की सरकार पर असर डालने की कोशिश की जा सकती है।

इसी मुद्दे को लेकर सामरिक मामलों के प्रसिद्ध विशेषज्ञ Brahma Chellaney ने एक बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि Donald Trump का यह कैसा “फ्रेंडली टेकओवर” है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर किए गए एक पोस्ट में चेलानी ने लिखा कि ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद अमेरिका ने Cuba के प्रति अपनी पुरानी नीति को और ज्यादा सख्त बना दिया है। उनका कहना है कि करीब 1 करोड़ 10 लाख की आबादी वाला क्यूबा इस समय गंभीर मानवीय संकट के मुहाने पर खड़ा है।

उन्होंने बताया कि क्यूबा अपनी बिजली उत्पादन की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 90 प्रतिशत तेल आयात करता है। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने Venezuela और Mexico से आने वाले तेल पर पूरी तरह रोक लगा दी। साथ ही अमेरिकी नौसेना ने समुद्री घेराबंदी इतनी कड़ी कर दी कि कोई जहाज आसानी से क्यूबा तक नहीं पहुंच पा रहा।

इसका नतीजा यह हुआ कि देश में बिजली संकट बेहद गहरा हो गया है। लाखों लोग बिजली से वंचित हो गए हैं। पानी के पंप बंद पड़े हैं, ट्रैक्टर और डिलीवरी ट्रक ठप हैं, खाने-पीने की चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और लोगों के सामने भूख का संकट खड़ा हो गया है। वहीं अस्पतालों में बार-बार होने वाले ब्लैकआउट के कारण इलाज करना भी मुश्किल होता जा रहा है।

सामरिक मामलों के विशेषज्ञ Brahma Chellaney ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे “फ्रेंडली टेकओवर” कहना समझ से परे है। उनके मुताबिक पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump जिस रणनीति को दोस्ताना कब्जा बता रहे हैं, वह दरअसल ताकत के बल पर किसी संप्रभु देश को झुकाने की कोशिश है।

चेलानी का कहना है कि अमेरिका ने Venezuela के राष्ट्रपति Nicolás Maduro के खिलाफ कड़े कदम उठाए, Iran पर हमले तेज किए और अब Cuba पर दबाव बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक यह रणनीति सीधे सैन्य युद्ध की जगह आर्थिक घेराबंदी और दबाव के जरिए किसी देश को कमजोर करने की कोशिश है।

उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी नौसैनिक ताकत का इस्तेमाल करके समुद्र में तेल के जहाजों को रोकना भले ही पारंपरिक युद्ध न हो, लेकिन इसके गंभीर मानवीय परिणाम हो सकते हैं।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

चेलानी की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर कई लोगों ने अपनी राय भी दी। एक यूजर एस.आर. शर्मा ने लिखा कि अमेरिका अक्सर सीधे युद्ध में जीतने के बजाय अपनी समुद्री और हवाई ताकत के जरिए विरोधी देशों को अलग-थलग करने की रणनीति अपनाता है।

उनके मुताबिक ईरान के मामले में भी इसी तरह का दबाव बनाने की कोशिश की गई, लेकिन वहां हालात अमेरिका के लिए आसान नहीं रहे। अब क्यूबा को निशाना बनाया जा रहा है, जिसकी अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है।

कुछ यूजर्स का मानना है कि ऐसी रणनीति का मकसद आर्थिक दबाव और संकट के जरिए लोगों में असंतोष पैदा करना होता है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़े। वहीं कई लोगों ने इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और नैतिकता से जुड़ा बड़ा सवाल भी बताया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस तरह की रणनीतियां सफल होती हैं, तो भविष्य में अन्य वैश्विक शक्तियां भी इसी तरह के कदम उठा सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

news desk

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