क्रिकेट को ‘अनिश्चितताओं का खेल’ कहा जाता है, लेकिन कभी-कभी यह ‘नियमों की जागरूकता’ का खेल भी बन जाता है। लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के बीच खेले गए हालिया मुकाबले ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। मैदान पर भले ही लखनऊ ने 5 विकेट से जीत दर्ज की हो, लेकिन कागजों और नियमों की दुनिया में यह जीत हैदराबाद की मुट्ठी से फिसल गई।
मैच की अंतिम दो गेंदों पर लखनऊ को जीत के लिए महज 1 रन की दरकार थी। स्ट्राइक पर ऋषभ पंत थे और गेंदबाज थे अनुभवी जयदेव उनादकट। पंत ने गेंद को बाउंड्री की ओर धकेला, लेकिन असली ड्रामा रस्सी के उस पार हुआ।
बाउंड्री के बाहर खड़े आवेश खान ने उत्साह में आकर गेंद के बाउंड्री लाइन पार करने से पहले ही उसे बल्ले से रोक दिया। तकनीकी रूप से, एक ‘नॉन-फिल्डर’ (जो खेल का हिस्सा उस वक्त नहीं है) का मैदान के अंदर दखल देना क्रिकेट के कड़े नियमों के खिलाफ है।
हैरानी की बात यह रही कि हैदराबाद के खेमे में से किसी ने भी इस घटना पर अंपायर से अपील नहीं की। क्रिकेट में जब तक फील्डिंग टीम अपील नहीं करती, अंपायर अक्सर स्वतः संज्ञान नहीं लेते।
LSG ने आसानी से 1 रन चुराया और मैच जीत लिया।
आवेश खान की गलती ‘स्मार्ट मूव’ बन गई क्योंकि उसे पकड़ा नहीं गया।
SRH के हाथ से जीता-जिताया मैच निकल गया।
सिर्फ बल्ले से नहीं, दिमाग से भी हार गई हैदराबाद?
यह मैच SRH के लिए एक बड़ा सबक है। आधुनिक क्रिकेट में जहाँ हर रन और हर गेंद की कीमत करोड़ों में होती है, वहाँ ICC कोड ऑफ कंडक्ट की जानकारी न होना आत्मघाती साबित हो सकता है। लखनऊ की जीत में आवेश खान की उस ‘गलती’ का बड़ा हाथ रहा, जिसे अगर हैदराबाद चुनौती देती, तो आज पॉइंट्स टेबल की तस्वीर कुछ और होती।
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