लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा दिलाने के लिए पिछले 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मामला अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर आ गया है।
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती वांगचुक को लेकर उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सरकार और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
गीतांजलि का दावा है कि अस्पताल में उनके पति के इलाज के नाम पर ‘अवैध हिरासत’ जैसी स्थिति बना दी गई है, जिसके खिलाफ उन्होंने अब सीधे दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

वांगचुक विवाद की 5 सबसे बड़ी बातें
- पत्नी का गंभीर आरोप: गीतांजलि जे. आंगमो ने कहा कि अगर सोनम वांगचुक की सेहत को कुछ भी नुकसान पहुंचता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल और सरकार की होगी।
- सफदरजंग अस्पताल पर अविश्वास: परिवार का आरोप है कि अस्पताल ने वांगचुक के पोटैशियम स्तर (Potassium Level) को लेकर अलग-अलग दावे किए, जिससे मेडिकल रिपोर्ट पर सस्पेंस गहरा गया है।
- निजी अस्पताल शिफ्ट करने की मांग: अस्पताल द्वारा डिस्चार्ज न किए जाने पर परिवार ने वांगचुक को अपनी पसंद के प्राइवेट अस्पताल में ले जाने के लिए हाईकोर्ट में तत्काल याचिका दायर की है।
- अस्पताल के बाहर कड़ा पहरा: वांगचुक की पत्नी के अनुसार, अस्पताल की मंजिल पर करीब 30 और पूरे परिसर में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिससे उनके साथ कैदियों जैसा व्यवहार हो रहा है।
- अस्पताल का बड़ा दावा: सफदरजंग प्रशासन का कहना है कि डॉक्टरों और AIIMS के विशेषज्ञों की सलाह के बावजूद सोनम वांगचुक और उनके परिवार ने इलाज (ORS और ड्रिप) के लिए सहमति देने से साफ इनकार कर दिया है।
मेडिकल रिपोर्ट पर सस्पेंस: 2.9 या 3.5? पत्नी ने उठाए सवाल
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट्स पर बड़ा विरोधाभास उजागर किया है। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल ने पहले उन्हें बताया कि वांगचुक का पोटैशियम स्तर गिरकर 2.9 हो गया है, जो बेहद जानलेवा है। लेकिन जब सरकारी हेल्थ बुलेटिन आया तो उसमें इस आंकड़े को छिपा लिया गया। वहीं, जब परिवार ने एक स्वतंत्र प्राइवेट लैब से जांच कराई तो पोटैशियम लेवल 3.5 (जो कि बिल्कुल सामान्य है) निकला।
अस्पताल या जेल? 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों का पहरा
गीतांजलि ने अस्पताल परिसर की स्थिति को बेहद डरावना बताते हुए कहा:
गीतांजलि जे. आंगमो का बयान: “यह इलाज नहीं, बल्कि एक तरह की अवैध हिरासत है। हमारे वार्ड की मंजिल पर 30 से ज्यादा और बाहर 100 से अधिक पुलिस वाले तैनात हैं। हमें अपने मरीज को किसी दूसरे निजी अस्पताल ले जाने की अनुमति भी नहीं दी जा रही है। इसी वजह से हमें तुरंत अदालत की शरण में जाना पड़ा।”
सफदरजंग अस्पताल ने जारी किया हेल्थ बुलेटिन, कहा- हालत स्थिर लेकिन…
दूसरी तरफ, शनिवार रात सफदरजंग अस्पताल ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की। अस्पताल के मुताबिक, 28 जून से भूख हड़ताल पर चल रहे सोनम वांगचुक फिलहाल होश में हैं और उनका ब्लड प्रेशर (BP) व ऑक्सीजन लेवल सामान्य है। हालांकि, लंबे समय से अन्न-जल त्यागने के कारण उनके शरीर में पानी की भारी कमी (Dehydration) हो चुकी है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें तुरंत नसों के जरिए इलेक्ट्रोलाइट्स नहीं दिए गए, तो अंग फेल होने जैसी गंभीर मेडिकल जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
आगे क्या होगा? अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट पर टिकी हैं कि क्या अदालत सोनम वांगचुक को किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की इजाजत देती है या नहीं। इस बीच, लद्दाख से लेकर दिल्ली तक इस मामले को लेकर सियासी और सामाजिक पारा लगातार चढ़ता जा रहा है।