Latest News

महिलाओं में हार्ट अटैक के संकेत पुरुषों से अलग, कई बार डॉक्टर भी नहीं पहचान पाते खतरा; जानिए क्यों बढ़ रहा जोखिम

नई दिल्ली: दिल की बीमारी को अक्सर पुरुषों से जुड़ी समस्या माना जाता है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में हृदय रोग एक गंभीर और बढ़ता हुआ स्वास्थ्य संकट है। आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं की मौत का कारण बनने वाली बीमारियों में हृदय रोगों की हिस्सेदारी कई प्रकार के कैंसर से भी अधिक है। इसके बावजूद महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण और जोखिम कारकों को लेकर जागरूकता अपेक्षाकृत कम है।

विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में हार्ट अटैक के कारण, लक्षण और बीमारी का स्वरूप पुरुषों से काफी अलग हो सकता है। यही वजह है कि कई बार मरीज और डॉक्टर दोनों शुरुआती संकेतों को पहचानने में चूक जाते हैं।

महिलाओं में क्यों अलग होते हैं हार्ट डिजीज के जोखिम?

उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता और पारिवारिक इतिहास जैसे जोखिम कारक पुरुषों और महिलाओं दोनों में समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। हालांकि महिलाओं के लिए कुछ अतिरिक्त कारक भी खतरा बढ़ा सकते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान प्री-एक्लेम्पसिया या जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी समस्याओं से गुजर चुकी महिलाओं में आगे चलकर हृदय रोग विकसित होने की आशंका अधिक रहती है। कई बार महिलाएं वर्षों बाद डॉक्टर को अपनी गर्भावस्था से जुड़ी इन जटिलताओं के बारे में नहीं बतातीं, जिससे जोखिम का सही आकलन नहीं हो पाता।

इसके अलावा पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), ल्यूपस और रूमेटाइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियां भी महिलाओं में हृदय संबंधी जोखिम बढ़ाने वाली स्थितियों में शामिल हैं।

मेनोपॉज के बाद क्यों बढ़ जाता है खतरा?

विशेषज्ञों के मुताबिक एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं के हृदय और रक्त वाहिकाओं को एक तरह की प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है। यही कारण है कि महिलाओं में हार्ट डिजीज का खतरा अक्सर पुरुषों की तुलना में कुछ वर्षों बाद दिखाई देता है।

लेकिन मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप रक्तचाप बढ़ सकता है, कोलेस्ट्रॉल का स्तर प्रभावित हो सकता है और धमनियों का लचीलापन भी घटने लगता है। यही वजह है कि 40 से 50 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं में हृदय रोग का जोखिम तेजी से बढ़ सकता है।

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण क्यों छूट जाते हैं?

हार्ट अटैक का सबसे सामान्य लक्षण छाती में दर्द माना जाता है, लेकिन महिलाओं में यह हमेशा उसी रूप में दिखाई नहीं देता। कई महिलाएं तेज दर्द की बजाय सीने में भारीपन, दबाव या असहजता महसूस करती हैं।

इसके अलावा महिलाओं में सांस फूलना, मतली, चक्कर आना, जबड़े में दर्द, ऊपरी पीठ में दर्द, अत्यधिक थकान और ठंडा पसीना आना जैसे लक्षण भी हार्ट अटैक का संकेत हो सकते हैं।

समस्या यह है कि इन लक्षणों को अक्सर तनाव, गैस, थकान या अन्य सामान्य कारणों से जोड़कर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं देतीं, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।

महिलाओं में हार्ट अटैक के कारण भी हो सकते हैं अलग

आमतौर पर पुरुषों में हार्ट अटैक बड़ी कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज के कारण होता है। लेकिन महिलाओं में स्थिति कई बार अधिक जटिल होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में छोटी रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करने वाली कोरोनरी माइक्रोवैस्कुलर बीमारी का खतरा अधिक हो सकता है। इसके अलावा कोरोनरी आर्टरी स्पाज्म यानी धमनियों का अचानक सिकुड़ जाना भी हार्ट अटैक की वजह बन सकता है।

कुछ मामलों में महिलाओं में कोरोनरी धमनी की दीवार फटने की स्थिति भी देखी जाती है, जिसका जोखिम विशेष रूप से प्रसव के बाद बढ़ सकता है।

क्यों नहीं पकड़ पाते सामान्य टेस्ट?

डॉक्टरों के अनुसार महिलाओं में होने वाली कुछ हृदय संबंधी समस्याएं पारंपरिक जांचों में हमेशा स्पष्ट नहीं दिखतीं। कई बार सामान्य एंजियोग्राम में बड़ी धमनियों में कोई स्पष्ट रुकावट दिखाई नहीं देती, जबकि समस्या छोटी रक्त वाहिकाओं या धमनी के असामान्य संकुचन से जुड़ी होती है।

ऐसे मामलों में हार्ट एमआरआई, पीईटी स्कैन या विशेष कोरोनरी फंक्शन टेस्टिंग जैसी उन्नत जांचों की आवश्यकता पड़ सकती है।

महिलाओं को क्या बरतनी चाहिए सावधानी?

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को अपने हृदय स्वास्थ्य को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। नियमित स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल की निगरानी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मधुमेह नियंत्रण जैसे उपाय जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं।

इसके साथ ही गर्भावस्था के दौरान हुई स्वास्थ्य समस्याओं, पीसीओएस, समय से पहले मेनोपॉज या ऑटोइम्यून बीमारियों की जानकारी डॉक्टर को देना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। समय पर पहचान और उचित उपचार से हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

vineet verma

Share
Published by
vineet verma
Tags: Cardiovascular Disease in WomenCoronary Microvascular DiseaseFemale CardiologyFemale Heart DiseaseHeart Attack in WomenHeart Attack Signs in WomenHeart Attack Warning SignsHeart Disease Risk in Womenheart health awarenessMenopause and Heart DiseasePCOS and Heart RiskWomen Cardiac HealthWomen Heart Attack SymptomsWomen's Health NewsWomen's Heart Healthकार्डियोलॉजी समाचारकार्डियोवैस्कुलर डिजीजकोलेस्ट्रॉल और हार्ट हेल्थदिल की बीमारी के कारणदिल की बीमारी के संकेतपीसीओएस और हार्ट डिजीजब्लड प्रेशर और हृदय रोगमहिला स्वास्थ्यमहिला स्वास्थ्य समाचारमहिला हृदय रोगमहिलाओं का हृदय स्वास्थ्यमहिलाओं की सेहतमहिलाओं में दिल की बीमारीमहिलाओं में हार्ट अटैकमहिलाओं में हार्ट रिस्क फैक्टरमेनोपॉज और हार्ट अटैकलाइफस्टाइल न्यूजस्वास्थ्य अपडेटहार्ट अटैक के लक्षणहार्ट अटैक चेतावनी संकेतहार्ट अटैक से बचावहार्ट केयरहार्ट डिजीज रिस्कहृदय रोग जागरूकताहेल्थ न्यूज हिंदी

Recent Posts

11 महीने तक बंद रहता है यह रहस्यमयी शिव मंदिर! साल में सिर्फ 28 दिन खुलते हैं कपाट, जंगल में बसता है महादेव का अद्भुत धाम

कन्नूर: भारत में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनकी परंपराएं और मान्यताएं उन्हें बाकी धार्मिक…

53 minutes ago

वायरस नहीं, आपकी रोजमर्रा की आदतें बना रही हैं बीमार! इन 4 लाइफस्टाइल डिजीज का खतरा तेजी से बढ़ा

नई दिल्ली: भारत में बीमारियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एक समय था…

1 hour ago

30 की उम्र में 60 साल जैसे घुटने! युवाओं में तेजी से बढ़ रहा ऑस्टियोआर्थराइटिस, लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजह

नई दिल्ली: ऑस्टियोआर्थराइटिस को लंबे समय तक बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता रहा…

1 hour ago

हर बार पेनकिलर खाना नहीं है समाधान! माइग्रेन के दर्द को काबू में रखने के लिए अपनाएं ये 7 असरदार तरीके

नई दिल्ली: माइग्रेन केवल सामान्य सिरदर्द नहीं, बल्कि एक जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जो व्यक्ति…

2 hours ago