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बेलपत्र नहीं… इस शिव मंदिर में भोलेनाथ को चढ़ाया जाता है जिंदा केकड़ा, सदियों पुरानी परंपरा के पीछे क्या है मान्यता?

सूरत: सावन के महीने में भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने की परंपरा पूरे देश में निभाई जाती है। लेकिन गुजरात में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर भी है, जहां श्रद्धालु महादेव को बेलपत्र के साथ जीवित केकड़ा अर्पित करते हैं। पहली नजर में यह परंपरा भले ही चौंकाने वाली लगे, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच यह सदियों पुरानी आस्था का हिस्सा मानी जाती है।

यह अनोखी परंपरा गुजरात के सूरत जिले स्थित रामनाथ घेला महादेव मंदिर में निभाई जाती है। समुद्र तट के करीब स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। खासकर मकर संक्रांति के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।

कान संबंधी समस्याओं से जुड़ी है मान्यता

स्थानीय मान्यता के अनुसार, जिन लोगों को कान दर्द, कान में संक्रमण या कान से जुड़ी अन्य परेशानियां होती हैं, वे भगवान शिव से स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में आकर जीवित केकड़ा अर्पित करते हैं।

भक्तों का विश्वास है कि भगवान शिव की कृपा से उन्हें राहत मिलती है। हालांकि, इस धार्मिक मान्यता की वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है और यह पूरी तरह स्थानीय आस्था एवं परंपरा पर आधारित है।

भगवान श्रीराम से जुड़ी बताई जाती है परंपरा

स्थानीय लोगों के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम इस स्थान पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने भगवान शिव की आराधना की और शिवलिंग की स्थापना की। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

मान्यता है कि समय के साथ यहां जीवित केकड़ा अर्पित करने की परंपरा भी शुरू हुई, जिसे आज भी श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाते हैं।

कैसे होती है पूजा?

श्रद्धालु पूजा की थाली में फूल, बेलपत्र, जल और जीवित केकड़ा लेकर मंदिर पहुंचते हैं। भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद केकड़ा अर्पित किया जाता है।

स्थानीय परंपरा के अनुसार, पूजा पूरी होने के बाद केकड़ों को किसी तरह की क्षति नहीं पहुंचाई जाती, बल्कि उन्हें दोबारा समुद्र में छोड़ दिया जाता है।

अनोखी परंपरा से मिली अलग पहचान

देशभर में भगवान शिव के हजारों मंदिर हैं, लेकिन जीवित केकड़ा अर्पित करने की सदियों पुरानी परंपरा इस मंदिर को विशेष पहचान देती है। समुद्र किनारे स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक मान्यता और परंपरा के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।

vineet verma

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