नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र का तीसरा सप्ताह सरकार और विपक्ष के बीच भारी हंगामे और गतिरोध की भेंट चढ़ गया। सत्र में अब महज एक सप्ताह का समय शेष बचा है, जिसके चलते आगामी सप्ताह में राजनीतिक तापमान चरम पर रहने के आसार हैं।
सरकार की नजरें अब दो सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विधेयकों परिसीमन व महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक और विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA) को पारित कराने पर टिकी हैं।
इस आर-पार की लड़ाई को देखते हुए मोदी सरकार ने अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने सांसदों की शत-प्रतिशत मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए तीन दिनों का थ्री-लाइन व्हिप (Three-Line Whip) जारी कर दिया है।
संसदीय गलियारों में FCRA और परिसीमन विधेयकों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच कड़ा टकराव देखने को मिल रहा है:
संसदीय गतिरोध के बीच बड़ा राजनीतिक उलटफेर होने की संभावना जताई जा रही है। सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों का मानना है कि दक्षिण भारत की प्रमुख पार्टी द्रमुक (DMK) परिसीमन बिल का समर्थन कर सकती है।
| मुख्य बिंदु | प्रस्तावित बदलाव और स्थिति |
| सीटों में बढ़ोतरी | गृह मंत्री ने बिल में 50% सीटें बढ़ाने का प्रावधान शामिल करने की बात कही है। |
| जनगणना से अलग | परिसीमन प्रक्रिया को नियमित जनगणना से अलग रखने का प्रस्ताव। |
| DMK का रुख | पार्टी ने कुछ शर्तें रखी हैं जिन पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। |
यदि DMK इस विधेयक के समर्थन में आती है, तो दक्षिण भारतीय राज्यों में परिसीमन का विरोध कर रहे क्षेत्रीय दलों के हाथ से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा छिन जाएगा।
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