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Serbia Election Result: भ्रष्टाचार के खिलाफ उतरे छात्रों ने पलटी सत्ता की बाजी, 14 साल पुराने शासन को झटका; वुसिक ने मानी हार

news desk
Last updated: October 26, 2026 9:33 am
news desk
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बेलग्रेड। भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब सर्बिया की राजनीति में बड़े बदलाव की वजह बन गया है। 25 अक्टूबर 2026 को हुए मध्यावधि संसदीय चुनाव में छात्र समर्थित ‘स्टूडेंट लिस्ट-स्टूडेंट्स विन’ ने लंबे समय से सत्ता पर काबिज अलेक्जेंडर वुसिक के राजनीतिक गठबंधन को करारा झटका दिया है। शुरुआती चुनावी अनुमानों में छात्र समर्थित सूची को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान जताया गया है। इसके बाद वुसिक ने अपनी हार स्वीकार कर ली।

Contents
1. सर्बिया में 14 साल से कायम राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती2. छात्र समर्थित सूची को पूर्ण बहुमत मिलने का अनुमान3. करीब 22 लाख वोटों के साथ छात्र आंदोलन ने दिखाई ताकत4. नतीजे आने से पहले ही वुसिक ने स्वीकार की हार5. नोवी साद रेलवे स्टेशन हादसे से शुरू हुआ था आंदोलन6. भ्रष्टाचार विरोध और संस्थागत सुधार बने प्रमुख मुद्दे7. राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर चुनावी मैदान में उतरे थे वुसिक8. सर्बिया की राजनीति में आगे क्या होगा?9. भारी मतदान ने बढ़ाई चुनाव की अहमियत10. सर्बिया के लिए यह जीत क्यों है अहम?

स्वतंत्र चुनावी अनुमानों के मुताबिक, छात्र समर्थित सूची को करीब 52 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है, जबकि वुसिक के गठबंधन को लगभग 39.3 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई। वुसिक ने अपने शुरुआती आकलन में छात्र समर्थित सूची को 250 सदस्यीय संसद में 135 से 140 सीटें मिलने की बात कही, जबकि उनके गठबंधन को करीब 105 सीटें मिलने का अनुमान है। हालांकि, ये शुरुआती आंकड़े हैं और अंतिम नतीजों की पुष्टि सर्बिया के निर्वाचन आयोग से होनी बाकी है।

1. सर्बिया में 14 साल से कायम राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती

सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) वर्ष 2012 से सर्बिया की राजनीति में प्रमुख ताकत बनी हुई थी। अलेक्जेंडर वुसिक प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए देश की राजनीति पर अपना प्रभाव बनाए रहे।

इस चुनाव में छात्र समर्थित सूची की बढ़त ने उनके राजनीतिक वर्चस्व को गंभीर चुनौती दी है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, अगर सीटों का यही गणित अंतिम नतीजों में कायम रहता है, तो सर्बिया में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो सकता है।

2. छात्र समर्थित सूची को पूर्ण बहुमत मिलने का अनुमान

सर्बिया की संसद में कुल 250 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए सामान्य बहुमत का आंकड़ा 126 सीटें है। चुनावी अनुमानों में छात्र समर्थित ‘स्टूडेंट लिस्ट’ को 135 से 140 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।

इसके मुकाबले वुसिक के नेतृत्व वाले गठबंधन को करीब 105 सीटें मिलने का अनुमान है। यदि यह अनुमान अंतिम नतीजों में बदलता है, तो छात्र समर्थित समूह अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच सकता है।

हालांकि, सीटों का अंतिम बंटवारा आधिकारिक नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा।

3. करीब 22 लाख वोटों के साथ छात्र आंदोलन ने दिखाई ताकत

वुसिक की ओर से साझा किए गए शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, छात्र समर्थित सूची को करीब 22 लाख वोट मिले, जबकि उनके गठबंधन को लगभग 17.2 लाख वोट हासिल हुए।

ये आंकड़े चुनावी अनुमानों पर आधारित हैं। अंतिम मतगणना पूरी होने के बाद वोटों और सीटों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। इसके बावजूद शुरुआती रुझान यह संकेत देते हैं कि छात्र आंदोलन ने पारंपरिक राजनीतिक दलों को कड़ी चुनौती दी है।

4. नतीजे आने से पहले ही वुसिक ने स्वीकार की हार

बेलग्रेड में अपनी पार्टी के चुनावी मुख्यालय से संबोधित करते हुए अलेक्जेंडर वुसिक ने स्वीकार किया कि उनका गठबंधन चुनाव हार गया है।

उन्होंने कहा कि शुरुआती आकलन के अनुसार छात्र समर्थित सूची को जीत मिली है। वुसिक ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम परिणाम अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन उपलब्ध आंकड़े उनके गठबंधन की हार की ओर संकेत कर रहे हैं।

यह स्वीकारोक्ति सर्बिया की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, क्योंकि छात्र आंदोलन ने लंबे समय से प्रभावशाली रहे राजनीतिक नेतृत्व को सीधी चुनौती दी है।

5. नोवी साद रेलवे स्टेशन हादसे से शुरू हुआ था आंदोलन

इस राजनीतिक बदलाव की जड़ें नवंबर 2024 में हुए एक दर्दनाक हादसे से जुड़ी हैं। सर्बिया के नोवी साद रेलवे स्टेशन पर छतरीदार ढांचा ढहने से 16 लोगों की मौत हो गई थी।

इस घटना के बाद देश में सरकारी जवाबदेही, भ्रष्टाचार और निर्माण कार्यों में कथित लापरवाही को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। धीरे-धीरे छात्रों ने आंदोलन की अगुवाई संभाल ली। विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन और शैक्षणिक गतिविधियों के बहिष्कार के जरिए आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

करीब दो साल तक चले इस विरोध ने सरकार पर जवाबदेही तय करने और संस्थागत सुधार करने का दबाव बनाया। आखिरकार छात्र समर्थित समूह ने चुनावी राजनीति में उतरकर वुसिक के गठबंधन को चुनौती दी।

6. भ्रष्टाचार विरोध और संस्थागत सुधार बने प्रमुख मुद्दे

छात्र आंदोलन की प्रमुख मांगों में सरकारी पारदर्शिता, भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच, संस्थानों की जवाबदेही और कानून के शासन को मजबूत करना शामिल रहा है।

आंदोलन से जुड़े लोगों ने पारंपरिक राजनीतिक दलों के विकल्प के तौर पर अपनी चुनावी सूची पेश की। इस रणनीति ने उन मतदाताओं को आकर्षित किया, जो मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से असंतुष्ट थे।

हालांकि, चुनाव जीतने के बाद इन मांगों को सरकारी नीतियों में बदलना नई राजनीतिक ताकत के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

7. राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर चुनावी मैदान में उतरे थे वुसिक

अलेक्जेंडर वुसिक ने 27 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने मध्यावधि संसदीय चुनाव में अपनी पार्टी के गठबंधन का नेतृत्व किया।

वुसिक का उद्देश्य संसदीय बहुमत हासिल कर नई सरकार के गठन में प्रमुख भूमिका निभाना था। लेकिन शुरुआती चुनावी अनुमानों ने उनकी रणनीति को बड़ा झटका दिया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि 25 अक्टूबर का चुनाव संसदीय चुनाव था, राष्ट्रपति चुनाव नहीं। वुसिक की हार का अर्थ उनके नेतृत्व वाले राजनीतिक गठबंधन की संसदीय हार है।

8. सर्बिया की राजनीति में आगे क्या होगा?

अगर शुरुआती अनुमानों के मुताबिक छात्र समर्थित सूची को 135 से 140 सीटें मिलती हैं, तो संसद में उसे स्पष्ट बहुमत हासिल हो सकता है। ऐसी स्थिति में नई सरकार के गठन और नीतिगत बदलावों का रास्ता खुलेगा।

लेकिन सरकार बनाना और उसे प्रभावी ढंग से चलाना अलग-अलग चुनौतियां हैं। भ्रष्टाचार की जांच, संस्थागत सुधार, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक ध्रुवीकरण जैसे मुद्दों पर नई व्यवस्था की परीक्षा होगी।

वहीं, वुसिक के नेतृत्व वाला गठबंधन संसद में विपक्ष की भूमिका निभाने की तैयारी कर सकता है। अंतिम तस्वीर निर्वाचन आयोग के नतीजों और सरकार गठन की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

9. भारी मतदान ने बढ़ाई चुनाव की अहमियत

सर्बिया के इस चुनाव में करीब 64.5 लाख मतदाता पंजीकृत थे। देश की 250 संसदीय सीटों के लिए 18 चुनावी सूचियां मैदान में थीं।

चुनाव के दौरान छात्र समर्थित सूची और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच मुकाबला देश की राजनीति का सबसे अहम घटनाक्रम बन गया। शुरुआती अनुमानों में छात्र आंदोलन की बढ़त ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भ्रष्टाचार और जवाबदेही के मुद्दे पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव को बदल सकते हैं।

10. सर्बिया के लिए यह जीत क्यों है अहम?

सर्बिया में छात्र आंदोलन की चुनावी सफलता इस बात का संकेत है कि लंबे समय तक चले जनविरोध को राजनीतिक विकल्प में बदला जा सकता है। हालांकि, इस जीत का वास्तविक महत्व इस बात से तय होगा कि नई राजनीतिक ताकत अपने वादों को किस हद तक पूरा करती है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई, संस्थानों की स्वतंत्रता और सरकार की जवाबदेही को लेकर जनता की अपेक्षाएं अब बढ़ेंगी। यदि छात्र समर्थित समूह इन मुद्दों पर ठोस कदम उठाता है, तो सर्बिया की राजनीति में लंबे समय तक बदलाव देखने को मिल सकता है।

सर्बिया का संसदीय चुनाव केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मुकाबला नहीं रहा। इसने भ्रष्टाचार विरोधी छात्र आंदोलन को देश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। शुरुआती अनुमानों में मिली बढ़त और वुसिक की हार स्वीकार करने की घोषणा के बाद अब सभी की नजरें आधिकारिक चुनाव परिणाम और नई सरकार के गठन पर हैं।

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