नई दिल्ली: लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच 30 मई 2026 को आम लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल विपणन कंपनियों ने लगातार कई बढ़ोतरी के बाद फिलहाल दाम स्थिर रखने का फैसला लिया है, जिससे वाहन चालकों को अस्थायी राहत मिली है।
गौरतलब है कि 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2.61 रुपये से 2.71 रुपये प्रति लीटर तक की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। बीते दो सप्ताह के दौरान यह चौथा मौका था जब ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ था। ऐसे में आज दाम स्थिर रहने से लोगों ने कुछ राहत की सांस ली है।
30 मई 2026 को प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं:
दिल्ली – पेट्रोल 102.12 रुपये, डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर
मुंबई – पेट्रोल 111.18 रुपये, डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर
कोलकाता – पेट्रोल 113.47 रुपये, डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर
चेन्नई – पेट्रोल 107.77 रुपये, डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर
बेंगलुरु – पेट्रोल 110.93 रुपये, डीजल 98.80 रुपये प्रति लीटर
हैदराबाद – पेट्रोल 115.69 रुपये, डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर
नोएडा – पेट्रोल 102.38 रुपये, डीजल 95.85 रुपये प्रति लीटर
गुरुग्राम – पेट्रोल 102.59 रुपये, डीजल 95.27 रुपये प्रति लीटर
लखनऊ – पेट्रोल 102.05 रुपये, डीजल 95.55 रुपये प्रति लीटर
देश के प्रमुख महानगरों की बात करें तो फिलहाल हैदराबाद में पेट्रोल और डीजल दोनों सबसे महंगे स्तर पर बिक रहे हैं। यहां पेट्रोल की कीमत 115.69 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है, जबकि डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।
वहीं राजधानी दिल्ली में अन्य बड़े शहरों की तुलना में ईंधन की कीमतें अपेक्षाकृत कम बनी हुई हैं।
अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि एक ही देश में अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग क्यों होती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट, स्थानीय कर और विभिन्न प्रकार के सेस हैं।
हर राज्य अपनी कर नीति के अनुसार ईंधन पर टैक्स निर्धारित करता है। यही कारण है कि एक राज्य से दूसरे राज्य और एक शहर से दूसरे शहर में कीमतों में अंतर दिखाई देता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में कुछ नरमी दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव में भी आंशिक कमी आने से वैश्विक बाजार को थोड़ी राहत मिली है।
इसी का असर घरेलू तेल कंपनियों के फैसलों पर भी देखने को मिला है और फिलहाल कीमतों में कोई नया संशोधन नहीं किया गया है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि राहत का यह दौर लंबा चलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। वैश्विक बाजार अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर तेजी आती है या डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दोबारा बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। तेल आयात का भुगतान डॉलर में किया जाता है। ऐसे में जब रुपया कमजोर होता है, तो आयात महंगा पड़ता है और इसका असर सीधे ईंधन की कीमतों पर दिखाई देता है।
यही वजह है कि पेट्रोल और डीजल के रेट तय होने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ रुपये और डॉलर की विनिमय दर भी अहम भूमिका निभाती है।
नई दिल्ली: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने जहाजों को…
नई दिल्ली: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई जितनी रोमांचक होती है,…
नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि कबूतर सैकड़ों किलोमीटर दूर से भी अपने…
पुणे: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के…
लखनऊ: राजधानी लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर यात्री शेड गिरने की घटना के बाद…
नई दिल्ली: सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने के एक वर्ष बाद भारत ने…