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OTT पर रिलीज से पहले भी लेनी होगी सेंसर बोर्ड की मंजूरी? सरकार बड़े नियम बदलाव की तैयारी में

नई दिल्ली: ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्मों की रिलीज को लेकर केंद्र सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 में संशोधन पर विचार कर रही है, जिसके तहत ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए भी पहले सेंसर बोर्ड से प्रमाणन अनिवार्य किया जा सकता है। हाल ही में बिना मंजूरी फिल्म ‘सतलुज’ के रिलीज होने के बाद इस दिशा में सरकार जल्द ठोस फैसला ले सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित बदलाव के तहत किसी भी फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से मंजूरी लेना अनिवार्य किया जा सकता है। इसके लिए आईटी नियम, 2021 में संशोधन आवश्यक होगा।

‘सतलुज’ विवाद के बाद तेज हुई कवायद

सरकार का यह कदम फिल्म ‘सतलुज’ के बिना प्रमाणन ओटीटी पर रिलीज होने के बाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि संबंधित फिल्म अभी भी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के विचाराधीन थी और इसमें कई दृश्यों में कटौती का सुझाव दिया गया था। इसके बावजूद फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जारी कर दी गई।

बाद में फिल्म को रिलीज के दो दिन बाद प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। सरकारी आदेश में इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कारणों का उल्लेख किया गया था।

ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ भी हो सकती है कार्रवाई

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, बिना प्रमाणन फिल्म का प्रदर्शन करने के मामले में संबंधित ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ भी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है। सरकार इस पूरे मामले की कानूनी समीक्षा कर रही है।

फिलहाल ओटीटी सामग्री पर लागू नहीं होते सीबीएफसी नियम

मौजूदा व्यवस्था में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध फिल्मों और अन्य सामग्री पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के प्रमाणन की अनिवार्यता लागू नहीं होती। इसी वजह से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए अलग व्यवस्था लागू है।

सरकार अब इस व्यवस्था में बदलाव कर ओटीटी फिल्मों को भी प्रमाणन प्रक्रिया के दायरे में लाने पर विचार कर रही है।

निजी प्रदर्शन पर राज्य सरकारों की होगी जिम्मेदारी

सरकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि बिना प्रमाणन किसी फिल्म का निजी स्थानों पर प्रदर्शन किया जाता है, तो कानून लागू कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होगी।

क्या है ‘सतलुज’ फिल्म का मामला?

हनी त्रेहन के निर्देशन में बनी फिल्म ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। फिल्म में 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार की जांच से जुड़े घटनाक्रम को दर्शाया गया है।

बताया गया है कि फिल्म को ओटीटी से हटाए जाने के बाद भी पंजाब के कई स्थानों, जिनमें कुछ गुरुद्वारे भी शामिल हैं, निजी तौर पर दिखाया जा रहा है। अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय भी बना हुआ है।

 

vineet verma

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