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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सरकार को जल्द मिलेगी एसआईटी रिपोर्ट, कई नए नामों पर भी कार्रवाई की चर्चा

लखनऊ: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी मामले की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है और इसे इसी सप्ताह या अगले 48 घंटे के भीतर शासन को सौंपे जाने की संभावना है। रिपोर्ट में पहले से सामने आए नामों के अलावा कुछ नए लोगों की भूमिका भी शामिल किए जाने की चर्चा है।

सरकार ने इस मामले की जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के लिए एसआईटी को 15 जुलाई तक का समय दिया था। हालांकि निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट जमा नहीं हो सकी। उच्च आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कुछ अतिरिक्त बिंदु जोड़े जा रहे हैं, जिसके बाद इसे शासन को सौंप दिया जाएगा।

रिपोर्ट में कई नए नाम जुड़ने की संभावना

सूत्रों के मुताबिक, अंतिम जांच रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी के मामले में कथित लापरवाही बरतने वाले डॉ. अनिल मिश्रा और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव के अलावा कुछ अन्य नए नाम भी शामिल किए जा सकते हैं। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ही पूरे मामले में जिम्मेदारी तय होने की तस्वीर साफ होगी।

13 जून को गठित हुई थी एसआईटी

सरकार ने 13 जून को लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था। एसआईटी ने 15 जून से जांच शुरू करते हुए सबसे पहले चढ़ावे की गणना व्यवस्था की पड़ताल की।

जांच के दौरान करीब 40 दिनों के सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की गई, जिसमें एसआईटी को 70 बार चोरी के साक्ष्य मिलने की बात सामने आई।

प्रारंभिक रिपोर्ट में छह लोगों को ठहराया गया था दोषी

एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा को चोरी में शामिल बताया था। इसके साथ ही डॉ. अनिल मिश्रा और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया था।

एसओपी के पालन में मिलीं गंभीर खामियां

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि चढ़ावे की गणना और प्रबंधन के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। गणना कार्य में लगे कर्मचारियों की तलाशी की व्यवस्था नहीं थी और बिना जेब वाले कपड़े पहनने का नियम भी लागू नहीं कराया गया।

इसके अलावा गणना स्थल पर आने-जाने वालों पर भी पर्याप्त नियंत्रण नहीं था। सीसीटीवी फुटेज में कुछ कर्मियों को रुपयों के बंडल छिपाते हुए भी देखा गया।

दान में मिली बहुमूल्य वस्तुओं की भी हुई जांच

एसआईटी ने मंदिर को दान में मिली बहुमूल्य वस्तुओं की भी जांच की। जांच में सभी वस्तुएं मंदिर के रिकॉर्ड में दर्ज मिलीं। कुछ वस्तुएं मंदिर प्रबंधन के पास सुरक्षित पाई गईं, जबकि कुछ को नियमानुसार गलाकर सुरक्षित रखा गया था।

रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर

एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद यह स्पष्ट होगा कि चढ़ावा चोरी प्रकरण में कुल कितने लोग जिम्मेदार पाए गए और उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले पर सभी की निगाहें अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

 

vineet verma

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