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रथयात्रा में आखिर क्यों रूठ जाती हैं माता लक्ष्मी? जानिए हेरा पंचमी की अनोखी कथा, जब भगवान जगन्नाथ से जताई नाराजगी

नई दिल्ली: भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा केवल आस्था और उत्सव का पर्व ही नहीं, बल्कि कई धार्मिक परंपराओं और कथाओं से भी जुड़ी हुई है। इन्हीं में से एक है हेरा पंचमी की परंपरा, जो माता लक्ष्मी और भगवान जगन्नाथ की अनोखी लीला का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथयात्रा के दौरान पांचवें दिन माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से मिलने गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं और उनकी नाराजगी की यह परंपरा आज भी श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है।

रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर जाते हैं, जिसे उनकी मौसी का घर माना जाता है। इसी यात्रा से जुड़ी कथा हेरा पंचमी के रूप में प्रसिद्ध है।

क्या है हेरा पंचमी का महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हेरा पंचमी मनाई जाती है। ‘हेरा’ का अर्थ होता है खोजना, जबकि ‘पंचमी’ का अर्थ है पांचवां दिन। इस दिन माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ की खोज में गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं।

पुरी में इस परंपरा का विशेष महत्व है और हर वर्ष इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ तथा माता लक्ष्मी की इस लीला का धार्मिक आयोजन किया जाता है, जिसे हेरा गोहा के नाम से जाना जाता है।

क्यों नाराज हो जाती हैं माता लक्ष्मी?

मान्यता है कि रथयात्रा पर रवाना होने से पहले भगवान जगन्नाथ माता लक्ष्मी से शीघ्र लौटने का वचन देते हैं। लेकिन गुंडिचा मंदिर पहुंचने के बाद वे वहीं ठहर जाते हैं और समय पर वापस नहीं लौटते।

जब भगवान अपने वचन के अनुसार वापस नहीं आते, तो माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। इसके बाद हेरा पंचमी के दिन वे पालकी में सवार होकर गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं और भगवान जगन्नाथ से अपनी नाराजगी प्रकट करती हैं।

रथ को पहुंचाती हैं आंशिक क्षति

धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ माता लक्ष्मी को जल्द लौटने का आश्वासन देते हैं, लेकिन उनकी नाराजगी तुरंत दूर नहीं होती। मान्यता है कि इसी क्रोध में माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ के रथ नंदिघोष को आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कर देती हैं।

इसके बाद भगवान जगन्नाथ उन्हें मनाते हैं और वापस लौटने का वचन देते हैं। इसी प्रसंग की स्मृति में हेरा पंचमी का पर्व मनाया जाता है।

आज भी निभाई जाती है यह परंपरा

पुरी में आज भी हेरा पंचमी के अवसर पर इस धार्मिक लीला का आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाता है। श्रद्धालु इसे भगवान जगन्नाथ और माता लक्ष्मी के दिव्य प्रेम, वचन और मान-मनुहार की प्रतीक लीला के रूप में देखते हैं।

 

vineet verma

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