नई दिल्ली: बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं बच्चों की त्वचा से जुड़ी कई परेशानियां भी बढ़ा देता है। हवा में बढ़ी नमी, पसीना और गंदगी के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपने लगते हैं। इसकी वजह से बच्चों की त्वचा पर लाल दाने, रैशेज, खुजली और जलन जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। समय रहते सावधानी बरती जाए तो इन समस्याओं को बढ़ने से रोका जा सकता है।
बच्चों को पहनाएं साफ और सूखे कपड़े
बारिश के मौसम में गर्दन, पीठ और छाती के आसपास लाल दाने सबसे ज्यादा दिखाई देते हैं। इसका एक बड़ा कारण पसीना और लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना है। बच्चों को बारिश में भीगने से बचाएं और यदि कपड़े गीले हो जाएं तो तुरंत बदल दें। साफ और सूखे कपड़े पहनाने से संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।
त्वचा की साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान
मानसून में बच्चों की त्वचा को साफ और सूखा रखना बेहद जरूरी है। बच्चों को नियमित रूप से नहलाएं और नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। खासकर गर्दन, बगल और घुटनों के पीछे की जगहों को नमी से बचाएं, क्योंकि इन हिस्सों में संक्रमण जल्दी फैल सकता है। त्वचा को मुलायम बनाए रखने के लिए हल्का मॉइस्चराइजर भी लगाया जा सकता है।
नीम के पानी से नहलाना हो सकता है फायदेमंद
कुछ मामलों में रासायनिक तत्वों वाले साबुन त्वचा की समस्या को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में नीम का पानी एक घरेलू विकल्प हो सकता है। रातभर नीम की पत्तियों को पानी में भिगोकर रखें और सुबह उसी पानी से बच्चे को नहलाएं। नीम में मौजूद प्राकृतिक गुण त्वचा को साफ रखने में मदद कर सकते हैं और दानों की समस्या कम करने में सहायक हो सकते हैं।
घर की सफाई पर भी दें ध्यान
बारिश के मौसम में कीड़े-मकोड़ों की संख्या बढ़ जाती है। इनके संपर्क में आने से बच्चों की त्वचा पर रैशेज और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। घर को साफ रखें, कपड़ों और बिस्तरों को नियमित रूप से धोएं तथा उन्हें अच्छी तरह सूखने और हवा लगने दें। इससे त्वचा संक्रमण का जोखिम कम किया जा सकता है।